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भगत सिंह का शहादत दिवस

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अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस पर बुधवार को उनका भावपूर्ण स्मरण किया गया। अनेक संस्थाओं की ओर से व्याख्यान, प्रदर्शनी, मंचन आदि के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया गया। अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद एवं शहीद-ए-आजम भगत सिंह स्मारक समिति के तत्वावधान में आजाद पार्क स्थित शहीद स्थल पर उनके तैल चित्रों पर फूलमाला चढ़ाकर नमन करने के बाद शहीदों की क्रांतिकारी परंपरा अमर रहे और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए गए। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लल्लू मरकरी के तैल चित्र पर भी फूल चढ़ाए गए।
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प्रदेश सरकार की ओर से सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने 21 गन शाट फायर कर, सम्मान गारद की ओर से सलामी तथा पुलिस बैंड ने राष्ट्रभक्ति की धुन बजाकर शहीदों के प्रति सम्मान प्रकट किया। बतौर मुख्य अतिथि मंडलायुक्त संजय गोयल ने कहा, भगत सिंह, सुखदेव तथा राजगुरु प्रतिभा तथा पराक्त्रस्म की उत्कृष्ट मिसाल थे। विशिष्ट अतिथि डॉ. नरेन्द्र कुमार सिंह गौड़ ने कहा, भगत सिंह की आखिरी ख्वाहिश थी कि उनकी हथकड़ियां खोल दीं जाएं, तीनों आपस में गले मिलें और वे मिले भी। कार्यक्रम अध्यक्ष राजू मरकरी ने कहा, उनका कारनामा पूरी दुनिया को झकझोरने वाला था।
बेसिक तथा माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों ने गायन, वादन, नृत्य तथा लघु नाटिका का मंचन करके भी शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। कवि मनमोहन सिंह ‘तन्हा’, रेनू राज सिंह तथा रश्मि शुक्ला, रचना, पीएन सिंह आदि ने रचनाओं से उन्हें याद किया। संचालन महासचिव राजबहादुर गुप्ता तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो.श्याम बिहारी ने किया। कार्यक्रम में प्रभाशंकर पांडेय, चीफ वार्डेन अनिल कुमार,विशाल गुप्ता, डॉ.अर्चना, धनंजय सिंह आदि मौजूद थे। वहीं अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद सेवा समिति डांडी की ओर से विकास मणि त्रिपाठी विपुल, पंकज अग्रवाल, पप्पू निषाद, विमल प्रसाद, शशिकांत आदि की मौजूदगी में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
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