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Prayagraj : पीडीए का प्लाट खरीदने वाले परेशान, बोले- 20 साल से है अपने घर का इंतजार, कब्जा मिला न पैसा

Fri, 26 Sep 2025 07:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अलोपीबाग के मनोज श्रीवास्तव ने 20 साल पहले प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) से प्लॉट खरीदा था। अब तक न तो कब्जा मिला न ही प्राधिकरण ने पैसा वापस किया।
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प्रयागराज विकास प्राधिकरण। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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अलोपीबाग के मनोज श्रीवास्तव ने 20 साल पहले प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) से प्लॉट खरीदा था। अब तक न तो कब्जा मिला न ही प्राधिकरण ने पैसा वापस किया। मनोज ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की तो रिपोर्ट लगा दी गई कि वह संतुष्ट हैं जबकि मनोज का दावा है कि पीडीए की ओर से इस बारे में उनसे किसी ने बात ही नहीं की गई।

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मनोज तो एक उदाहरण मात्र हैं। पीडीए से प्लाॅट खरीदने वाले सैकड़ों लोग इसी तरह से परेशान हैं और अपने घर का सपना लिए वर्षों से भटक रहे हैं। वर्षों पहले पीडीए ने जो प्लॉट आवंटित किए, बाद में विवाद के कारण पीडीए उन पर कब्जा नहीं दिला सका। आवंटियों का कहना है कि अगर पीडीए भी भरोसा तोड़ देगा तो वे कहां जाएंगे। उनका सवाल है कि क्या पीडीए को नहीं पता था कि उसकी जमीन विवादित है? क्या यह कोई साजिश है कि पहले विवादित प्लॉट आवंटित कर दिया जाए और बाद में उस पर कब्जा दिलाने के नाम पर आवंटियों परेशान किया जाए?

ऐसे ही तमाम सवालों के साथ सैकड़ों आवंटी वर्षों से पीडीए के चक्कर लगा रहे हैं। मनोज ने बताया कि 2005 को नीम सराय आवास योजना के अंतर्गत 112.50 वर्ग मीटर का आवंटन प्राप्त किया था। आवंटन के बाद 20 मई 2025 को 26,000 रुपये का प्रारंभिक भुगतान किया। इसके बाद 25 जुलाई 2005 को 58,188 रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी किया। 2013 में पीडीए के तत्कालीन संयुक्त सचिव ने लिखित रूप में निर्देश दिया था कि रजिस्ट्री के लिए बकाया राशि पर 18 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित 4,81,870 रुपये का भुगतान किया जाए, जिसे उन्होंने 31 मार्च 2014 को अदा कर दिया था। इसके अलावा सात जून 2014 को 33,475 रुपये का विकास शुल्क भी अदा किया गया।

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फिर, 27 जून 2014 को 81,020 रुपये की स्टांप ड्यूटी, फ्रीहोल्ड शुल्क और रजिस्ट्रेशन शुल्क का भुगतान भी किया। भूमि का रजिस्ट्रेशन 27 जून 2014 को पूर्ण रूप से किया गया था लेकिन बाद में इस विवादित बताकर कब्जा नहीं दिया गया। फिर मिशन संगम-एक एवं मिशन संगम-दो के तहत दूसरी जगह प्लॉट या फ्लैट लेने का विकल्प दिया गया। मनोज ने दोनों बार आवेदन किया लेकिन नया प्लॉट नहीं मिला। अब पीडीए जाते हैं तो कहा जाता है कि पांच फीसदी की साधारण ब्याज दर पर पैसा वापस ले लें। मनोज कहना है कि यह कैसा न्याय है, 18 फीसदी की ब्याज दर से पीडीए को भुगतान किया और अब पीडीए पांच फीसदी की ब्याज पर पैसा वापस लेने के लिए कहा रहा है। मनोज ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की लेकिन वहां भी हताश होना पड़ा।

निस्तारण आख्या में बताया गया कि आवंटी से फोन पर बात हुई और वह संतुष्ट हैं। मनोज का दावा है कि उनसे किसी ने बात ही नहीं की। आख्या में जो फोन नंबर दिया गया है, वह कोई पढ़ नहीं सकता। ऐसा लग रहा है कि जानबूझकर खराब हैंडराइटिंग में नंबर लिखा गया ताकि बाद में नंबर को लेकर कोई दावा न किया जा सके। आख्या में यह प्रावधान है कि जो लागू न हो उसे काट दिया जाए और आख्या में असंतुष्ट के कॉलम को काटा गया है।

असंतुष्ट के कॉलम को काटा नहीं गया है बल्कि उस पर सही का निशान लगाया गया है। ऑनलाइन भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि आवंटी असंतुष्ट है। आवंटी की फाइल पर काम किया जा रहा है। - सूरज कुमार पटेल, जोनल अफसर एवं जांच अधिकारी, पीडीए

आख्या में झोल ही झोल

आख्या के प्रारूप में दिया गया है कि आवंटी के असंतुष्ट होने की दशा में जो लागू न हो उसे काट दिया जाए। पहला यह कि निस्तारण की गुणवत्ता में सुधार संभव है। अत: संबंधित अधिकारी को गुणवत्ता सुधार कर पुन: समुचित निस्तारण के लिए निर्देश दिया जाए। दूसरा यह कि आवेदक द्वारा की जा रही अपेक्षा विधिसम्मत पूर्ण होने के योग्य नहीं है। अत: निस्तारण की गुणवत्ता के प्रति आश्वस्त हूं। अग्रेतर कार्यवाही की आवश्यकता नहीं है। आख्या में इन दोनों में से कोई लाइन नहीं काटी गई है।
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