फिर, 27 जून 2014 को 81,020 रुपये की स्टांप ड्यूटी, फ्रीहोल्ड शुल्क और रजिस्ट्रेशन शुल्क का भुगतान भी किया। भूमि का रजिस्ट्रेशन 27 जून 2014 को पूर्ण रूप से किया गया था लेकिन बाद में इस विवादित बताकर कब्जा नहीं दिया गया। फिर मिशन संगम-एक एवं मिशन संगम-दो के तहत दूसरी जगह प्लॉट या फ्लैट लेने का विकल्प दिया गया। मनोज ने दोनों बार आवेदन किया लेकिन नया प्लॉट नहीं मिला। अब पीडीए जाते हैं तो कहा जाता है कि पांच फीसदी की साधारण ब्याज दर पर पैसा वापस ले लें। मनोज कहना है कि यह कैसा न्याय है, 18 फीसदी की ब्याज दर से पीडीए को भुगतान किया और अब पीडीए पांच फीसदी की ब्याज पर पैसा वापस लेने के लिए कहा रहा है। मनोज ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की लेकिन वहां भी हताश होना पड़ा।
निस्तारण आख्या में बताया गया कि आवंटी से फोन पर बात हुई और वह संतुष्ट हैं। मनोज का दावा है कि उनसे किसी ने बात ही नहीं की। आख्या में जो फोन नंबर दिया गया है, वह कोई पढ़ नहीं सकता। ऐसा लग रहा है कि जानबूझकर खराब हैंडराइटिंग में नंबर लिखा गया ताकि बाद में नंबर को लेकर कोई दावा न किया जा सके। आख्या में यह प्रावधान है कि जो लागू न हो उसे काट दिया जाए और आख्या में असंतुष्ट के कॉलम को काटा गया है।
असंतुष्ट के कॉलम को काटा नहीं गया है बल्कि उस पर सही का निशान लगाया गया है। ऑनलाइन भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि आवंटी असंतुष्ट है। आवंटी की फाइल पर काम किया जा रहा है। - सूरज कुमार पटेल, जोनल अफसर एवं जांच अधिकारी, पीडीए
आख्या में झोल ही झोल
आख्या के प्रारूप में दिया गया है कि आवंटी के असंतुष्ट होने की दशा में जो लागू न हो उसे काट दिया जाए। पहला यह कि निस्तारण की गुणवत्ता में सुधार संभव है। अत: संबंधित अधिकारी को गुणवत्ता सुधार कर पुन: समुचित निस्तारण के लिए निर्देश दिया जाए। दूसरा यह कि आवेदक द्वारा की जा रही अपेक्षा विधिसम्मत पूर्ण होने के योग्य नहीं है। अत: निस्तारण की गुणवत्ता के प्रति आश्वस्त हूं। अग्रेतर कार्यवाही की आवश्यकता नहीं है। आख्या में इन दोनों में से कोई लाइन नहीं काटी गई है।