असमंजस के बीच पीसीएस मुख्य परीक्षा के नए प्रारूप के लिए मंथन शुरू हो गया है। नए तथा पुराने प्रारूप पर चर्चा के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में 24 और 25 जनवरी को कार्यशाला बुलाई गई है। इसमें देश भर के विशेषज्ञों के अलावा इलाहाबाद समेत अन्य विश्वविद्यालय के कुलपति तथा कई वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस आमंत्रित किए गए हैं। विशेषज्ञ परीक्षा प्रारूप का खाका तैयार करेंगे। कार्यशाला के आयोजन से यह माना जा रहा है कि आयोग पीसीएस-2017 से ही सिविल सेवा का प्रारूप लागू करने पर गंभीर है। हालांकि, अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।
पीसीएस-2017 प्रारंभिक परीक्षा 19 मार्च को प्रस्तावित है। आयोग की कोशिश है कि परीक्षा समय से कराई जाए। इसके लिए जरूरी है कि इसी महीने विज्ञापन जारी कर दिया जाए। इसके विपरीत आयोग में पीसीएस-2017 से ही मुख्य परीक्षा में सिविल सेवा का प्रारूप लागू करने की कवायद की जा रही है, लेकिन अभी तक सरकार की मंजूरी नहीं मिली है। आचार संहिता की वजह से नई सरकार बनने तक शासन से मंजूरी की भी उम्मीद नहीं है। हालांकि, असमंजस की इस स्थिति के बीच आयोग पीसीएस-2017 से सिविल सेवा का प्रारूप लागू करने के सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है।
इसी क्रम में आयोग में 24 जनवरी से दो दिनी कार्यशाला होने जा रही है। इसमें पीसीएस मुख्य परीक्षा के पुराने तथा सिविल सेवा के नए प्रारूप पर मंथन होगा। आयोग के अफसरों के अनुसार इसमें तय होगा कि नए प्रारूप में सिविल सेवा का कौन सा खंड और किस रूप में शामिल किया जाए। इस मकसद से विशेषज्ञों के समक्ष सिविल सेवा के साथ उन राज्यों का सिलेबस भी रखा जाएगा, जहां नया प्रारूप लागू हो गया है।