कोमा में जाने वाले, कैंसर से, चोट लगने से या फिर किसी और कारणों से सिकुड़ जाने वाली सांस की नलियों से अब जीवन की डोर नहीं टूटेगी । मोती लाल नेहरू मेडिकल (एमएलएनएम) कॉलेज केडॉक्टर मरीजों की ऐसी समस्याओं से निपटने का तरीका जान लिया है। कॉलेज के ईएनटी विभाग के डॉक्टर ने प्रशिक्षण के बाद ऑपरेशन भी किया है। सफलतापूर्वक सर्जरी के बाद मरीज की हालत बेहतर है। डॉक्टर का कहना है कि ऐसी सर्जरी यूपी के किसी और हॉस्पिटल में अभी नहीं हो रही है।
ईएनटी विभाग के डॉ. सचिन जैन ने बताया कि ‘ट्रेकियल रिसेक्शन एंड अनोस्टोमोसिस’ सर्जरी में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए वह दो महीने के लिए स्विटजर लैंड के चुव हॉस्पिटल एयरवे सेक्टर लौसाने गए हुए थे। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद जब वह यहां आए तो उन्होंने जौनपुर जिले के गांव विजाधर मऊ तहसील मछलीशहर के रहने वाले रोहित कुमार (22) की सर्जरी की। सर्जरी पूरी तरह सफल रही। रोहित को सांप ने कांट लिया था। वह 10 दिनों तक आईसीयू में रहा। इससे उसकी सांस की नलियां दो सेमी सिकुड़ गईं थी। इससे उसको सांस लेने में परेशानी होने लगी। डॉ. जैन की अगुवाई में प्लास्टिक सर्जन डॉ. मोहित जैन, डॉ. वैभव सिंह, डॉ. राजीव, डॉ. अर्पिता, डॉ. सुशील शर्मा, डॉ. दिनेश जैन, डॉ. शिवेंद्र सिंह, डॉ. हिमानी की टीम ने
डॉ. रोहित के सांस की नलियों की सर्जरी की। उसके सिकुड़े वाले हिस्से को काटकर निकाल दिया गया और बचे भाग को फिर से जोड़ दिया गया। इसे चिकित्सा के शब्दों में इसे इंड टू इंट अनोस्टोमोसिस कहा जाता है। सफलतापूर्वक सर्जरी के 10 दिनों बाद मरीज पूरी तरह से ठीक है। फिलहाल उसे निगरानी में रखा गया है। मेडिकल कॉलेज में इस सर्जरी के होने से मरीजों को बहुत फायदा होगा। दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में इस सर्जरी के लिए चार-पांच लाख रुपये लिए जा रहे हैं लेकिन यहां पर यह बहुत ही कम पैसे में होगी।