पीसीएस जे-2018 की मुख्य परीक्षा में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के एक सदस्य का बेटा भी शामिल हुआ था लेकिन, मुख्य परीक्षा में वह फेल हो गया। ऐसे में परीक्षा को लेकर भ्रष्टाचार के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, अब उन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
पीसीएस जे मेंस में असफल अभ्यर्थी अड़े हैं कि परीक्षा में धांधली हुई और वे चाहते हैं कि परीक्षा दोबारा कराई जाए। अभ्यर्थियों का दावा है कि एक ही कमरे में बैठे आठ अभ्यर्थी प्री और मेंस में सफल घोषित कर दिए गए। साथ ही प्रारंभिक परीक्षा के दौरान रोल नंबर की एक श्रृंखला के तहत 378 में 45 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया और इनमें से 35 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में पास हो गए। अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर प्रार्थना की है कि वह मामले में स्वत: संज्ञान लें और इसकी जांच करें। इन तमाम आरोपों के बीच यह बात सामने आई कि पीसीएस जे परीक्षा में आयोग के एक सदस्य का पुत्र भी शामिल हुआ था। वह प्रारंभिक परीक्षा में सफल रहा लेकिन, मुख्य परीक्षा में फेल हो गया।
आयोग के सचिव जगदीश ने भी पुष्टि की है कि आयोग के एक सदस्य का बेटा मेंस में शामिल हुआ था लेकिन, वह फेल हो गया। सचिव के मुताबिक यह उदाहरण है कि परीक्षा में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार नहीं हुआ है। पीसीएस जे प्री का परिणाम आने के साढ़े चार माह तक किसी ने उंगली नहीं उठाई मगर, मुख्य परीक्षा में रिजल्ट आने के बाद इसमें असफल अभ्यर्थियों ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाने शुरू कर दिए। आयोग ने पूरी ईमानदारी से परीक्षा कराई है। भ्रष्टाचार के सभी आरोप बेबुनियाद हैं। रही बात कि कुछ अभ्यर्थियों के क्रमवार प्री और मेंस में पास होने की, तो प्री में योग्य अभ्यर्थी ही सफल हुए और इन्हीं योग्य अभ्यर्थियों ने मुख्य परीक्षा दी। ऐसे में मुख्य परीक्षा में भी इनके सफल होने पर किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।