इलाहाबाद। पीसीएस-2014 के अंतिम परिणाम में एक बार फिर खास जाति के अभ्यर्थियों का दबदबा होने की बात कही जा रही है। उत्तर प्रदेश लोेक सेवा आयोग ने चयनितों के नाम घोषित नहीं किए हैं लेकिन प्रतियोगियों का दावा है कि एसडीएम पद पर चयनित कुल 42 में से 14 एक जाति विशेष के हैं। इतना ही नहीं चयनितों की सूची में आयोग ने एक ही रोल को दो बार शामिल किया है। इससे भी परिणाम विवादों में घिर गया है।
डॉ.अनिल यादव के अध्यक्ष बनने के बाद से आयोग की भर्तियों में एक खास जाति और क्षेत्र के लोगों को वरियता देने के आरोप लगातार लग रहे हैं। पीसीएस-2014 से पहले की तीन भर्तियों में एसडीएम के कुल 86 में से 56 खास जाति से चयनित हुए। प्रतियोगियों का दावा है कि उन्होंने आयोग तथा एक-दूसरे से संपर्क करके जो आंकड़े एकत्र किए हैं उसके अनुसार पीसीएस-2014 में भी एसडीएम के 42 पद में से 14 पर उसी जाति के अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। जबकि, ओबीसी के कुल पदों की संख्या 17 है। डिप्टी एसपी के भी 92 में से 28 उसी जाति के हैं। जबकि ओबीसी के पदों की संख्या 39 है। इसी तरह से शीर्ष के अन्य पदों पर भी एक जाति के लोगों का वर्चस्व है।
इतना ही नहीं बीडीओ पद के लिए चयनित पीएच कोटा के एक अभ्यर्थी का रोल नंबर चयनितों की सूची में दो बार शामिल किया गया है। इससे भी पीसीएस-2014 के रिजल्ट पर सवाल उठने लगा है। आयोग के एक अफसर का कहना है कि यह चूकवश हो गया लेकिन सवाल यह खड़ा होता है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई जब आयोग के हर परिणाम और फैसले पर आपत्तियां उठ रही हैं। प्रतियोगी छात्रसंघर्ष समिति के अवनीश पांडेय का कहना है कि इस चोरी को छिपाने के लिए डॉ.अनिल यादव ने चयनितों के नाम न घोषित करने का निर्णय लिया। धांधली छिपाने के लिए आयोग में कई अन्य विवादित फैसले लिए गए। इतना नहीं पीसीएस-2011 और 2012 की उत्तर पुस्तिकाएं भी जला दीं गईं लेकिन वे सभी तरह की धांधली को उजागर करके रहेंगे। अशोक पांडेय का कहना है कि आरटीआई के तहत पीसीएस-2014 के चयनितों के नाम मांगे जाएंगे। साथ में यह मुद्दा भी न्यायालय में ले जाया जाएगा।