बिना सत्यापन के कर दिया गया भुगतान
कहा गया है वर्ष 2021-22 के भी एक करोड़ रुपये के बिल कंपनी की ओर से पेश किए गए थे। विभागीय स्तर पर जब इन बिलों का सत्यापन कराया गया तब पता चला कि काम हुए ही नहीं है। जिन कार्यों के बिल लगाए गए थे, वह मौके पर पाए नहीं गए। इसके बाद उन बिलों का भुगतान रोक दिया गया। लेकिन, संबंधित अफसर के तबादले के बाद वर्ष 2022-23 के भी एक करोड़ रुपये के बिल इन्हीं मदों में प्रस्तुत किए गए। शिकायत में कहा गया है कि इन बिलों का सत्यापन कराए बिना ही सीनियर डेन अंकित गुप्ता ने दो करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है।
इस मामले में वर्क इंस्पेक्टर महेश कुमार एडिशनल डेन अंकित शुक्ला की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के बाद इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है। विजिलेंस की ओर से फिरोजाबाद जोन में इन दो वर्षों में कराए गए कार्यों से संबंधित रिकॉर्ड तलब कर लिए गए हैं। इस मामले में संबंधित अफसरों से विजिलेंस ने जानकारी भी मांगी है।
दो करोड़ रुपये के फर्जी बिलों के भुगतान के संबंध में विजिलेंस टीम ने जो भी जानकारियां मांगी हैं, उसे उपलब्ध करा दिया गया है। किसी तरह की गड़बड़ी नहीं की गई है। विजिलेंस को इससे संबंधित जो भी साक्ष्य चाहिए, वह उपलब्ध कराए जाएंगे। - अंकित गुप्ता, सीनियर डेन, फिरोजाबाद जोन