कई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं मे ंजीत चुके हैं पदक
इससे पवन का हौसला और बढ़ गया। घर से मिले सपोर्ट के बाद पवन ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और वर्ष 1993, 94 व 1995 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की ओर से वह इंटर यूनिवर्सिटी खेल का हिस्सा बने। इसके बाद उन्हें पैरा खेलों के बारे में जानकारी हुई, जोकि दिव्यांगों के लिए खेली जाती है। पवन ने पैरा से शुरूआत की और वर्ष 1996 में इंग्लैंड पहुंचे, जहां पहली बार वह अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा का हिस्सा बने। इसके बाद पवन कुमार शर्मा ने 2002 में कोरिया, 2005 में मलेशिया, 2010 में चीन, 2013 में चीन में आयोजित हुई अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में हिस्सा लिया और पदक जीता।
पवन ने उम्र, हालात और आर्थिक स्थितियों को दरकिनार करते हुए सफलताओं की सीढ़ी चढ़ी। इसी खेल ने उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में समीक्षा अधिकारी के पद पर नौकरी भी दिलाई। पवन ने बताया कि उनकी लगन और मेहनत ही उनकी सफलता का एकमात्र मंत्र है। वह इस उम्र में भी हर रोज़ चार से छह घंटे का अभ्यास करते हैं। उन्होंने अपने घर पर ही टेबल टेनिस का सेटअप तैयार कर रखा है, जहां वह रोजाना व्हील चेयर पर अभ्यास करते हैं।
खेल को त्यागकर कोचिंग देने का लिया था निर्णय
पवन ने बताया कि वर्ष 2017 में उनके घुटने का आॅपरेशन हुआ। इससे वह पूरी तरह से टूट गए थे कि उनका खेल अब उनसे दूर हो जाएगा। इसी बीच उन्होंने फैसला लिया कि वह भले न खेलें लेकिन वह कोचिंग देने के बहाने इस खेल के साथ अपना जुड़ाव रखेंगे। पवन ने चोंट से उबरने के बाद कोचिंग शुरू करने की योजना तैयार की। इसी बीच उन्हें लगा कि वह व्हील चेयर के सहारे अपना खेल जारी रख सकते हैं, जिसके बाद उन्होंने फिर से खेल खेलना शुरू किया और बेहतरीन प्रदर्शन करने लगे। रोजाना की कड़ी मेहनत से उन्होंने अपना खेल और मजबूत कर लिया, जिसके बाद इजिप्ट में होने वाली पैरा ओपेन प्रतियोगिता के लिए वह क्वालीफाई कर गए।
पैरा ओलंपिक में पदक जीतने का है सपना
पवन ने बताया कि उनका सपना पैरा ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतने का है। इसी के साथ वह अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भारत के लिए और पदक जीतना चाहते हैं।
बेटे की भी है टेबल टेनिस में रूचि
पवन के 14 वर्षीय बेटे ओम शर्मा को भी टेबल टेनिस में बहुत रूचि है। बेटा जिला स्तर की कई स्पर्धाओं में हिस्सा ले चुका है और मेडल भी जीत चुका है। पवन ने बताया कि उनका बेटा एक बड़ा खिलाड़ी बने, इसी उद्देश्य के साथ वह भी बराबर अपने बेटे को ट्रेनिंग देते रहते हैं। पवन की पत्नी उर्वी शर्मा का भी सपना है कि उनके पति और उनका बेटा दोनों देश के लिए मेडल जीतें।