हनुमानगंज निवासी शीतल केसरवानी को पैरों में सूजन, सुस्ती व नसों में दर्द के चलते छह दिन पहले एसआरएन अस्पताल में भर्ती किया गया। इलाज पूरा होने से पहले ही बुधवार को दबाव बनाकर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। यह कोई एक मरीज की नहीं, बल्कि भर्ती सभी मरीजों की समस्या रही।
हड़ताल की वजह से ट्रॉमा ट्रायज, इमरजेंसी मेडिसिन, सर्जरी, सात व 10 नंबर वार्ड में भर्ती मरीजों को जबरन डिस्चार्ज कर दिया गया। सर्जरी के पुरुष वार्ड में दरवाजे पर कुंडी लगा दी गई। दोपहर 12 बजे तक सभी वार्डों में सन्नाटा पसर गया। तीन दिन में 150 से ज्यादा मरीजों के ऑपरेशन टाल दिए गए। कब होंगे यह बताया नहीं गया। कुछ मरीज इलाज के अभाव में मरीज को रेफर कराकर चले गए।
ऐसे में पुरानी बिल्डिंग के वार्ड सात और 10 के 25-25 बेड, न्यूरो सर्जरी विभाग के 21 बेड व पुरुष सर्जरी वार्ड के सभी 30 बेड खाली रहे। इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह से ठप रहीं। कई एंबुलेंस ट्रॉमा के बाहर मरीज को लेकर काफी देर तक खड़ी रहीं। हड़ताल की वजह से मरीजों को वापस ले गईं।