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यूपीपीएससी : आयोग के परिसर में योग और विवेकानंद का संदेश, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने किया योगपीठम उद्घाटन

Mon, 19 Oct 2026 04:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को योग, आत्मचिंतन और राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने की पहल। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने यूपीपीएससी परिसर में आदित्य पतंजलि योगपीठम् का उद्घाटन और स्वामी विवेकानंद की विशाल प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान उन्होंने चयन प्रक्रिया में पहचान नहीं, योग्यता को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया।
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यूपीपीएससी परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण किया गया। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) परिसर में अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को योग, आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव की प्रेरणा देने वाला नया केंद्र मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने नवनिर्मित आदित्य पतंजलि योगपीठम् का उद्घाटन कर इसे युवाओं को आत्मबोध और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ने की पहल के रूप में स्थापित किया। इस अवसर पर उन्होंने परिसर में स्वामी विवेकानंद की विशाल प्रतिमा का अनावरण भी किया। आयोग के इतिहास में यह पहला अवसर बताया गया, जब सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवारत न्यायमूर्ति ने परिसर का आधिकारिक दौरा किया। कार्यक्रम में योग, सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्र निर्माण और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया को एक साथ जोड़ने का संदेश दिया गया।

योग, आत्मचिंतन और राष्ट्र गौरव का केंद्र बनेगा योगपीठम

आदित्य पतंजलि योगपीठम को केवल एक भवन के रूप में नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों के मानसिक विकास और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करने वाले स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहां सूर्य नमस्कार की विभिन्न मुद्राओं को प्रदर्शित किया गया है। साथ ही देश के नोबेल पुरस्कार विजेताओं के योगदान को भी स्थान दिया गया है, ताकि युवा भारत की बौद्धिक उपलब्धियों और वैश्विक पहचान से परिचित हो सकें। स्वामी विवेकानंद की विशाल प्रतिमा का अनावरण इस पहल का प्रमुख आकर्षण रहा। विवेकानंद के विचार युवाओं को आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देते हैं। आयोग परिसर में इस प्रतिमा की स्थापना को अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणादायी वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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कार्यक्रम में मौजूद सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विक्रमनाथ, आयोग के चेयरमैन संजय श्रीनेत समेत अन्य। - फोटो : अमर उजाला।

चयन में पहचान नहीं, योग्यता ही सर्वोपरि: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि न्यायालय और भर्ती प्रक्रिया, दोनों में निष्पक्षता का विशेष महत्व है। न्यायालय में प्रभाव या सत्ता के बजाय साक्ष्य और तर्क निर्णायक होते हैं। उसी तरह भर्ती में किसी व्यक्ति की पहचान या अनुग्रह के बजाय उसकी योग्यता को महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्याय का सिंहासन हो या चयन की वेदी, व्यक्तिगत पहचान नहीं, बल्कि पात्रता की गूंज को मान्यता मिलनी चाहिए।

उनके अनुसार, आयोग का काम केवल परीक्षाएं कराना नहीं, बल्कि देश के भविष्य के लिए योग्य लोकसेवकों का चयन करना है। चयनित अधिकारियों के निर्णयों का असर आने वाले वर्षों के प्रशासन और सुशासन पर पड़ता है। न्यायमूर्ति ने यह भी कहा कि निष्पक्षता केवल होनी ही नहीं चाहिए, बल्कि प्रक्रिया में दिखाई भी देनी चाहिए। उन्होंने आयोग की चयन व्यवस्था और परिसर में विकसित की गई सुविधाओं की सराहना की।

न्यायपालिका और चयन संस्थाओं की बुनियाद है लोक विश्वास

आयोग के अध्यक्ष संजय श्रीनेत ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायपालिका और चयन संस्थाओं के कार्यक्षेत्र अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों की बुनियाद लोक विश्वास है। न्यायपालिका नागरिकों को न्याय का भरोसा देती है, जबकि चयन संस्थाएं समान अवसर के संवैधानिक विश्वास को मजबूत करती हैं।  उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और निष्पक्षता से ही संस्थाओं के प्रति लोगों का भरोसा कायम रहता है। आयोग का उद्देश्य योग्य अभ्यर्थियों को अवसर देकर प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है।

संग्रहालय और शौर्य स्थल का भी किया निरीक्षण

कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने आयोग परिसर स्थित बोधि संगम, कल्पवृक्ष संग्रहालय और हल्दीघाटी शौर्य स्थल का निरीक्षण किया। बोधि संगम को अभ्यर्थियों के आत्मचिंतन के लिए विकसित किया गया है। वहीं, कल्पवृक्ष संग्रहालय में भवन की ऐतिहासिक यात्रा और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया है।

हल्दीघाटी शौर्य स्थल पर दांडी मार्च की प्रतिकृति, स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियां और अशोक स्तंभ परिसर की ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय पहचान को दर्शाते हैं। इन स्थलों के माध्यम से अभ्यर्थियों को देश के इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराने का प्रयास किया गया है।राहुल चतुर्वेदी, अजीत सिंह और राजीव लोचन मेहरोत्रा सहित अन्य न्यायमूर्ति, वरिष्ठ अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी तथा आयोग के सदस्य और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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आवासों का लोकार्पण, कर्मचारियों को सम्मान

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने वृंदावन ऑफिसर्स आवास के 12 नवनिर्मित आवासों का लोकार्पण किया और आयोग के आधिकारिक कैलेंडर का विमोचन किया। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में आयोग के सदस्य मेजर जनरल (डॉ.) मनोज कुमार ने आयोग की कार्यप्रणाली और पारदर्शी प्रक्रियाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। धन्यवाद ज्ञापन आयोग के सदस्य डॉ. ए.के. वर्मा ने किया। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति अशोक भूषण, इलाहाबाद हाईकोर्ट के तमाम न्यायमूर्तिगण मौजूद रहे। 

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