फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिला पंचायत में दलों पर भारी निर्दलीय

Mon, 02 Nov 2015 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला पंचायत सदस्य पद के परिणामों ने संकेत दे दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में सपा को भाजपा और बसपा से तगड़ी चुनौती मिलने जा रही है। वहीं, भाजपा और बसपा को भी इस बात का एहसास हो गया है कि मतदाता उनसे भी बहुत खुश नहीं हैं। रही बात कांग्रेस की तो जिला पंचायत के चुनाव में उसका सफाया हो गया। किसी भी सीट पर कांग्रेस कब्जा नहीं कर सकी जबकि चुनाव से पहले लड़ाई में कहीं नजर नहीं आ रहे अपना दल ने तकरीबन आधा दर्जन सीटों पर कब्जा कर संकेत दे दिया है कि आगामी चुनावों में प्रमुख दलों को अपना दल टक्कर देने को तैयार है। सोमवार को जिला पंचायत सदस्य पद की मतगणना पूरी होने के बाद बड़ी संख्या में निर्दलीयों की जीत इस बात का जीता-जागता उदाहरण है।
विज्ञापन


हालांकि चुनाव से पहले सपा को छोड़ अन्य सभी प्रमुख दलों ने जिला पंचायत सदस्य पद के लिए तकरीबन सभी सीटों से पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की थी। इलाहाबाद में जिला पंचायत सदस्य की सभी 92 सीटों के परिणाम सामने आने के बाद जिन 20 फीसदी सीटों पर सपा का कब्जा होने की बात हो रही है, उन सीटों से ऐसे प्रत्याशी जीते हैं जो कहीं न कहीं सपा से जुड़े हुए हैं। हालांकि इनमें से कुछ प्रत्याशी पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़े थे, सो सपा के खाते में आई 20 फीसदी सीटों का आंकड़ा और कम हो सकता है। सर्वाधिक 45 फीसदी सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों का कब्जा रहा। इससे यह तो साफ हो गया है कि प्रमुख दलों से समर्थन पाकर चुनाव मैदान में उतरे ज्यादातर प्रत्याशियों को वोटरों ने नकार दिया।

भाजपा और बसपा के लिए संतोष वाली बात यह रही कि उनके खाते में 15-15 फीसदी सीटें आ गईं जबकि जगजाहिर है कि पंचायत चुनाव में हमेशा सत्ता पक्ष का प्रभाव रहता है। इसके बावजूद दोनों दलों को अपेक्षा के मुताबिक सफलता नहीं मिली। ऐसे में आगे का सफर उनके लिए भी आसान नहीं है। सबसे खराब हालत कांग्रेस की रही, जो चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल सकी। बहादुरपुर ब्लॉक के वार्ड 24 से कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक प्रमुख गुलाब यादव की पत्नी ललिनी देवी चुनाव जीती हैं लेकिन कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया था। हालांकि परिणाम सामने आने के बाद अब सभी दलों ने निर्दलीयों पर दावा करना शुरू कर दिया है ताकि आंकड़ों को अपने पक्ष में कर यह साबित कर सकें कि उनकी पार्टी सबसे मजबूत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें