इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति पहेली बन गई है। प्रोफेसर एके सिंह के इस्तीफा के 15 महीने बाद भी विश्वविद्यालय में नए कुलपति की नियुक्ति नहीं हो पाई। इससे विश्वविद्यालय में सबकुछ ठप हो गया है। मुश्किल यह है कि पैनल के लिए तीन से पांच नाम पर सहमति बनने के बजाय इस दौड़ में शामिल लोगों की सूची और लंबी होती जा रही है। इसे लेकर छात्रों का प्रतिनिधिमंडल छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह के नेतृत्व में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी तथा मंत्रालय के अफसरों से मिलेगा।
प्रोफेसर एके सिंह ने पिछले साल जुलाई में इस्तीफा दिया था। इसके बाद नए कुलपति की खोज के लिए सर्च कमेटी तो बना दी गई लेकिन अलग-अलग विवादों की वजह से मामला लंबित होता गया। अब राष्ट्रपति के पास भेजने के लिए तीन से पांच नामों के पैनल पर सहमति नहीं बन पा रही है। सर्च कमेटी की कई बैठकें हुईं लेकिन कुलपति का चयन अब भी पहेली बना हुआ है।
इस देरी के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप की बात भी कही जा रही है। परिसर में खुले तौर पर चर्चा है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ या भाजपा का नजदीकी ही कुलपति बनेगा। इसी आधार पर कई नाम पर चर्चा भी खुलकर हो रही है। इसी क्रम में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कई शिक्षकों के अलावा बीएचयू के प्रोफेसर, मध्य प्रदेश में भर्ती संस्था से जुडे़ शिक्षक का नाम भी तेजी से सामने आ रहा है। बीएचयू के प्रोफेसर की पत्नी भाजपा में बड़ी नेता हैं। शिक्षकों के अलावा सेना से रिटायर एक बड़े अफसर के नाम पर भी चर्चा की बात कही जा रही है। इस तरह से कुलपति की इस दौड़ में 18 दावेदार शामिल हो गए हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय में नए कुलपति की कब तक नियुक्ति हो पाएगी इस बारे में कहना मुश्किल हो गया है। इसे लेकर छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल एक-दो दिनों में मानव संसाधन विकास मंत्री तथा अफसरों से मिलेगा। छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह का कहना है कि मंत्रालय में जल्द से जल्द कुलपति की नियुक्ति के साथ कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होगी।