याची का जब मेडिकल परीक्षण किया गया तो उसे कलर ब्लाइंडनेस का शिकार पाया गया। इस आधार पर याची की सेवाएं वर्ष 2007 में समाप्त कर दी गईं। याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची के अधिवक्ता का कहना था कि चूंकि याची की नियुक्ति हो चुकी थी और वह सेवा मेंं था। उन्होंने 1995 एक्ट के अनुच्छेद 33 का हवाला दिया, जिसमें एक फीसदी ऐसे लोगों के लिए पद आरक्षित रखने के लिए कहा गया है जो कि दृष्टिबाधित अथवा बधिर हैं।
कहा गया कि याची यदि इस पद के लिए योग्य नहीं है तो उसे उसी वेतनमान पर किसी दूसरे पद पर स्थानांतरित कर दिया जाए। अधिवक्ता का कहना था चूंकि जब याची की नियुक्ति हुई थी तो उसे कलर ब्लाइंडनेस नहीं थी, इसलिए उसे इस बीमारी के आधार पर सेवा से बर्खास्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक अंबेडकर नगर के आदेश को खारिज करते हुए याची को सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है।