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गूगल के यू-ट्यूब चैनल से वेब लिंक हटाने के आदेश पर यथास्थिति का आदेश

Mon, 05 Oct 2020 08:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यह था मामला

यूपीएसआईडीसी के चीफ इंजिनियर अरुण मिश्र ने गगूल एलआईसी और यू-ट्यूब के खिलाफ कानपुर नगर की सिविल कोर्ट में वाद दाखिल किया है जिसमें कहा गया है कि पूर्व में उनके विरुद्ध कुछ विभागीय कार्यवाही हुई थी। उन सभी मामलों में अब उनको उत्तराखंड और दिल्ली के उच्च न्यायालयों से क्लीन चिट मिल चुकी है। इसके बावजूद गूगल या यू-ट्यूब पर अरुण मिश्र का नाम सर्च करने पर उनके बारे में वही पुरानी सामग्री दिखाई जाती है जिसमें वह बरी हो चुकी है। मांग की गई है कि गूगल को उनसे जुड़ी जानकारियां हटाने का आदेश दिया जाए। सिविल कोर्ट ने इसे लेकर दाखिल स्थायी निषेधाज्ञा की अर्जी एकपक्षीय रूप से स्वीकार कर ली है। हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सर्च इंजन गूगल और इसके चैनल यू-ट्यूब पर से विवादित सामग्री और उसका वेब लिंक हटाने के सेशन कोर्ट कानपुर नगर के एकपक्षीय आदेश पर यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता अरुण मिश्र से इस मामले में जवाब तलब किया है। गूगल एलआईसी और गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने इस मामले में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर सेशन कोर्ट के 15 फरवरी 2020 और 14 सितंबर 2020 के आदेश को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए मामले में अगले आदेश तक यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया है। 

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court - फोटो : सोशल मीडिया
गूगल और गूगल इंडिया का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि सेशन कोर्ट ने स्थायी निषेधाज्ञा का आदेश एकपक्षीय तरीके से पारित किया है। याची को उसका पक्ष रखने और सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। याची के विरुद्ध इस मामले में दाखिल सिविल सूट की उसे जानकारी नहीं थी और न ही उसे कोई नोटिस प्राप्त हुआ।
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वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था कि सिविल सूट और निषेधाज्ञा अर्जी में गूगल का जो पता दिया गया है वह सही नहीं है। नोटिस जिसके पते पर भेजा गया वह गूगल का अधिकृत एजेंट नहीं है। इसलिए सिविज जज सीनियर डिविजन ने 15 फरवरी को याची के विरुद्ध स्थायी निषेधाज्ञा का आदेश पारित करते हुए उसे विवादित सामग्री यूट्ब चैनल और गूगल से वेबलिंक हटाने का आदेश दे दिया।  इस आदेश की जानकारी होने पर गूगल की ओर से सेशन कोर्ट में स्थगनादेश की अर्जी दी गई मगर सेशन कोर्ट ने 14 सितंबर को उसकी अर्जी खारिज कर दी। जिसे याचिका में चुनौती दी गई है।
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