गूगल और गूगल इंडिया का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि सेशन कोर्ट ने स्थायी निषेधाज्ञा का आदेश एकपक्षीय तरीके से पारित किया है। याची को उसका पक्ष रखने और सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। याची के विरुद्ध इस मामले में दाखिल सिविल सूट की उसे जानकारी नहीं थी और न ही उसे कोई नोटिस प्राप्त हुआ।
वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था कि सिविल सूट और निषेधाज्ञा अर्जी में गूगल का जो पता दिया गया है वह सही नहीं है। नोटिस जिसके पते पर भेजा गया वह गूगल का अधिकृत एजेंट नहीं है। इसलिए सिविज जज सीनियर डिविजन ने 15 फरवरी को याची के विरुद्ध स्थायी निषेधाज्ञा का आदेश पारित करते हुए उसे विवादित सामग्री यूट्ब चैनल और गूगल से वेबलिंक हटाने का आदेश दे दिया। इस आदेश की जानकारी होने पर गूगल की ओर से सेशन कोर्ट में स्थगनादेश की अर्जी दी गई मगर सेशन कोर्ट ने 14 सितंबर को उसकी अर्जी खारिज कर दी। जिसे याचिका में चुनौती दी गई है।