इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज के जिलाधिकारी की ओर से पूर्व ग्राम प्रधान शिवपूजन तिवारी के खिलाफ पारित 14,84,510 रुपये के सरचार्ज (वसूली) आदेश को रद्द कर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज के जिलाधिकारी की ओर से पूर्व ग्राम प्रधान शिवपूजन तिवारी के खिलाफ पारित 14,84,510 रुपये के सरचार्ज (वसूली) आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 27 व पंचायत राज नियमावली के नियम 256 और 257 के तहत सरचार्ज की कार्रवाई निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार ही की जा सकती है।
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याची शिवपूजन तिवारी 2010 से 2015 तक ग्राम पंचायत के निर्वाचित प्रधान रहे। उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पर जिलाधिकारी ने जिला प्रोबेशन अधिकारी और कनिष्ठ अभियंता की जांच समिति गठित की थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर पूर्व प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव को 29,69,021 रुपये के नुकसान के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि नियमों के अनुसार जांच का अधिकार मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी, सहकारी समितियां एवं पंचायत को है। जिला प्रोबेशन अधिकारी और कनिष्ठ अभियंता की समिति वैधानिक रूप से अधिकृत नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि मूल जांच ही अधिकार-क्षेत्र से बाहर होने के कारण पूरी कार्यवाही दोषपूर्ण हो गई। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पद छोड़ने के बाद भी पूर्व प्रधान के खिलाफ सरचार्ज कार्यवाही हो सकती है और निजी शिकायत भी इसकी शुरुआत का आधार बन सकती है। अधिकारियों को कानून के अनुसार नए सिरे से कार्रवाई की स्वतंत्रता दी गई है।