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मैनेजमेंट कॉलेज को दाखिले की अनुमति नहीं देने का आदेश रद्द

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गाजियाबाद के ध्यानार्थ
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मैनेजमेंट कॉलेज को दाखिले की
अनुमति नहीं देने का आदेश रद्द
0 एआईसीटीई की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी, नए सिरे से निर्णय लेने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने इंटीग्रेटेड एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी गाजियाबाद को सत्र 2019-20 में छात्रों का प्रवेश लेने की अनुमति न देने के आदेश को मनमानापूर्ण और अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) नई दिल्ली को याची को सुनवाई का मौका देकर नियमानुसार आदेश प्राप्ति तिथि से एक सप्ताह में नए सिरे से निर्णय लेने का आदेश दिया है। भवन के कब्जे का प्रमाणपत्र (ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट) न होने के कारण काउंसिल ने इस सत्र में कोर्स में प्रवेश की अनुमति देने से इंकार कर दिया था, जिसे चुनौती दी गई थी। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने इंटीग्रेटेड एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी की याचिका पर दिया है।
याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और अभिनव गौर का कहना था कि याची का कॉलेज 1996 से स्थापित है और अब तक लगातार उसे एआईसीटीई से मान्यता मिलती रही है। शैक्षणिक सत्र 2017-18 में भी मान्यता दी गई। 19 जुलाई 2016 को एआईसीटीई ने एक पत्र जारी कर सभी तकनीकी संस्थाओं के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया। इसमें नए संस्थानों के अलावा पहले से चले आ रहे संस्थान भी शामिल हैं। याची कॉलेज ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी करने का आवेदन दिया है। एआईसीटीई की मान्यता कमेटी के समक्ष यह जानकारी रखी गई थी, मगर इस तथ्य पर विचार किए बगैर काउंसिल ने मनमाने तौर पर उसे प्रवेश लेने से रोक दिया है। जबकि, संस्थान सभी निर्धारित मानक पूरा करता है।
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कोर्ट ने एआईसीटीई की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि एआईसीटीई को जितने व्यापक अधिकार दिए गए हैं, उतनी बड़ी उसकी जिम्मेदारी भी है। उसे अपने नियमों को स्पष्टता से रखना और समग्रता से लागू करना चाहिए। इस मामले में काउंसिल की ओर से निर्णयों को लागू करने में अनियमितता दिखाई दी है। कोर्ट ने काउंसिल को कॉलेज की मान्यता पर पुनर्विचार कर सकारण आदेश पारित करने के लिए कहा है।
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