हाईकोर्ट ने विधानसभा सचिवालय में समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी भर्ती में हुई धांधली की जांच का आरोप दिया है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव विधान सभा को इस मामले में जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। दीपक कुमार राय और अन्य अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति एपी साही और न्यायमूर्ति डीएस तिवारी की पीठ ने इस आदेश के साथ याचिका निस्तारित कर दी है।
याची के अधिवक्ता आरपी सिन्हा और समीर श्रीवास्तव का कहना था कि पूर्व विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय के निर्देश पर विधानसभा सचिवालय में 47 समीक्षा अधिकारी और 60 सहायक समीक्षा अधिकारियों की भर्ती का विज्ञापन निकाला गया। 18 अक्तूबर 2016 को इसका परिणाम घोषित किया गया। लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के साक्षात्कार के लिए चार पैनल बनाए गए। कुल 1113 लोगों का साक्षात्कार लिया गया।
चयन परिणाम जारी होने पर पता चला कि कई अयोग्य अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया। इनमें कई लोग पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के नजदीकी और रिश्तेदार हैं। ऐसे लोगों को भी नियुक्ति दे दी गई जिनका नाम अंतिम चयन सूची में शामिल नहीं था। एक अभ्यर्थी सौरभ सिंह की आयु 19 वर्ष है, जबकि चयन में न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए। यह भी कहा गया कि 18 अक्तूबर 2016 को परिणाम घोषित होने के 24 घंटे के भीतर कई लोगों की ज्चाइनिंग करा दी गई। आरक्षण नियमों की भी अनदेखी गई और मात्र सिद्धार्थनगर से ही 13 लोगों की नियुक्ति की गई है। याचिका में 45 चयनित अभ्यर्थियों को भी पक्षकार बनाया गया है।