लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के 124 बाबुओं, सुपवाइजरों एवं मेठों ने बीटेक की फर्जी डिग्री लगाकर जूनियर इंजीनियर के पद पर पदोन्नति पा ली। सत्यापन के दौरान पाया गया कि पदोन्नति पाने वालों में अधिकांश ने दूरस्थ शिक्षा से जुडे़ राजस्थान विद्यापीठ टेक्निकल यूनिवर्सिटी से डिग्री हासिल की है। इस संस्थान को दूरस्थ शिक्षा के तहत प्रदेश के बाहर कोर्स चलाने की अनुमति नहीं है। जबकि इलाहाबाद में इसने अपना स्टडी सेंटर खोल रखा है। इसी की डिग्री प्रमोशन पाने के लिए लगाई गई। मामला खुला तो जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि इस जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं। सत्यापन में 12 अभ्यर्थियों की डिग्री सही पाई गई है।
पीडब्ल्यूडी की ओर से डिग्री के वेरीफिकेशन कराए जाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच में पता चला कि प्रमोशन पाने वाले अधिकतर अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद में विश्वविद्यालय के सामने खुले राजस्थान विद्यापीठ टेक्निकल यूनिवर्सिटी के स्टडी सेंटर से बीटेक की डिग्री दूरस्थ मोड से हासिल की है। प्रमोशन पाने वाले 124 अभ्यर्थियों में से अधिकांश इलाहाबाद से हैं। पदोन्नति दिसंबर 2015 में की गई थी। पीडब्ल्यूडी ने इन अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों के वेरीफिकेशन के लिए यूजीसी को भेजा था।
यूजीसी ने मार्च 2016 में भेजी अपनी रिपोर्ट में इन प्रमाण पत्रों को गलत बताया। दरअसल, यूजीसी ने दूसरे राज्यों में विवि के सेंटर खोलकर टेक्निकल डिग्री देने को पहले ही अमान्य करार दिया है। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के पास प्रमाण पत्रों को जांच के लिए भेज दिया। हालांकि यूजीसी के साथ एआईसीटीई भी ऐसी डिग्रियों को फर्जी बता चुका है। इसके बावजूद दोबारा जांच के लिए प्रमाण पत्रों को भेजा गया है। इसे विभाग के ही लोग गलत बता रहे हैं और प्रक्रिया को दोषियों को बचाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
‘ विभाग में पहले से काम कर रहे बाबू, सुरवाइजर एवं मेठों को दिसंबर 2015 में प्रमोशन दिया गया था। इनके प्रमाण पत्रों पर आपत्ति के बाद अब एआईसीटीई से प्रमोशन पाने वालों की डिग्री के बारे में जानकारी मांगी गई है। इसकी रिपोर्ट मिलते ही कार्रवाई की जाएगी। ’’
एचएन पांडेय, मुख्य अभियंता और जांच अधिकारी, पीडब्ल्यूडी, इलाहाबाद