इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 वर्ष पूर्व महोबा जिले के कबरई थानांतर्गत हुई घटना के मामले में चारों आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान आपस में तालमेल नहीं खाते हैं। अभियोजन पक्ष तथ्यों और सबूतों को ठोस तरीके से प्रस्तुत करने में अक्षम रहा। इस वजह से याचिका खारिज की जाती है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने नोखे लाल की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
याची ने महोबा जिले केसत्र न्यायाधीश केआदेश को चुनौती थी। सत्र न्यायालय ने आरोपियों को बरी कर दिया था। याची का कहना था कि आरोपियों ने 11 मई 2004 को महोबा जिले के कबरई जाने केदौरान उसे रास्ते में रोक लिया और बंदूक सहित अन्य हथियारों से घायल कर दिया। उससे 10 हजार रुपये देने की मांग की।
बाद में याची भागा तो प्रतिवादी धनी, राजू, हरीराम प्रजापति और धीरेंद्र सिंह ने उसकी मां अच्छी देवी और बहन सुधा को मारा-पीटा और दुकान में रखे सामान को तितर बितर कर दिया। मामले में चारों आरोपियों के खिलाफ कबरई थाने में 11 मई 2004 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सत्र न्यायालय ने मामले में चारों आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि सत्र न्यायाधीश काफैसला सही था, उसमें कोई बदलाव की जरूरत नहीं है।