बिना जजों के खुली कचहरी
प्रयागराज। जिला न्यायालय में शनिवार को शायद ऐसा पहली बार हुआ जब अदालतों में वकील, कर्मचारी और वादकारी तो मौजूद थे पर जज नहीं थे। मुकदमे थे पर न तो उन पर डेट लगी और न पुकार हुई। नए मुकदमों का दाखिला भी नहीं हुआ। ऐसा हुआ जिला न्यायालयों में अवकाश की नई व्यवस्था के तहत। हाईकोर्ट ने इस वर्ष से जिला न्यायालयों में हर चौथे शनिवार को न्यायिक अधिकारियों को अवकाश देने की व्यवस्था शुरू कर दी है।
जनवरी का आखिरी शनिवार होने के कारण न्यायिक अधिकारी तो अवकाश पर थे, मगर कचहरी बंद नहीं थी। लिहाजा कर्मचारी और वकील रोज की तरह हाजिर हुए, लेकिन अदालतों में कोई कामकाज नहीं हो सका। बड़ी संख्या में वादकारी और अधिवक्ता कचहरी पहुंचे, लेकिन उन्हें न तो तारीखें मिलीं और न ही कोई कार्यवाही उनके पक्ष में हुई। वादकारियों को इस बंदी की सूचना नहीं थी। अधिवक्ता यह जानते हुए कि न्यायिक अधिकारी कोर्ट में अवकाश पर रहेंगे, मगर उनको उम्मीद थी कि मुकदमों का दाखिला और नकल आदि का काम होगा, जैसा कि हाईकोर्ट में शनिवार को होता है।
कई अधिवक्ताओं ने दाखिला करने का प्रयास किया, लेकिन मुंसरीम और बाबू ने स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया कि कर्मचारी सिर्फ पेंडिंग वर्क ही करेंगे। दाखिला या नकल दिए जाने का कोई निर्देश नहीं है। अधिवक्ताओं में इस बात को लेकर असमंजस है कि इसे अवकाश माना जाए या न्यायालय आने पर उनका कार्यालय से कोई काम हो पाएगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता यतींद्र मिश्र, वीरेंद्र कुमार राय, जितेंद्र कुमार शुक्ला आदि अधिवक्ताओं ने जिला जज से इस बात को स्पष्ट करने के लिए कहा है और मांग की है कि चौथे शनिवार को कम से कम मुकदमों का दाखिला पत्रावलीयों में पैरवी और आदेशों की नकलें प्रदान किए जाने का निर्देश दिया जाए, जिससे अवकाश की सार्थकता हो और अधिवक्ताओं तथा वादकारियों को उसका लाभ मिल सके।