संगम नोज पर शनिवार की शाम ज्ञान, भक्ति वैराग्य के साथ ही नाम की महिमा का बखान किया गया। मानस कथा व्याख्याता योगाचार्य स्वामी आनंद गिरि महाराज ने भगवान शिव की ओर से मां भवानी को सुनाई गई कथा के प्रसंगों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कलियुग में नाम की महिमा का वर्णन किया। कहा कि भगवान राम का नाम लेकर भव सागर से बेड़ा पार लगाया जा सकता है।
योगाचार्य ने बताया कि जगत को विश्राम देने के कारण दशरथ के बड़े पुत्र का नाम राम रखा गया। जबकि भरण-पोषण की महिमा केचलते दूसरे पुत्र का नाम नाम भरत पड़ा। जिसके नाम से शत्रुता मिट जाए उसका नाम शत्रुघ्न और धरती के धारक के रूप में लखन लाल का नाम लक्ष्मण रखा गया। ये चारों भाई वेद सूत्रों के सार हैं। उन्होंने संगीतमय रामकथा में बताया कि राजा दशरथ के समय आसुरी शक्तियों के चलते ऋषि-मुनि यज्ञ तक नहीं कर पा रहे थे। इसीलिए भगवान राम को अत्याचार के अंत के लिए अवतार लेना पड़ा था।
संत ने कहा कि राष्ट्र व विश्व के कल्याण के लिए साधु-संतों को सत्ता के दरवाजे पर जाना पड़े तो यह चिंता की बात है। ऐसे में सत्ता को चाहिए कि वह साधु-संतों से लोकहित पर सलाह लेकर आगे बढ़े। यही वजह थी कि विश्व के कल्याण के लिए महर्षि विश्वामित्र के प्रस्ताव को दशरथ नहीं ठुकरा सके। यज्ञ की रक्षा के लिए अपने पुत्रों राम और लक्ष्मण को उन्होंने विश्वामित्र को सौंप दिया था। संत ने कहा कि खुद को सुधारने और दूसरों को स्वीकार करने से सद्गति का मार्ग प्रशस्त होता है। अच्छे कर्म करने वाले का उद्धार ईश्वर अवश्य करता है। इस मौकेपर देवेंद्र मिश्र, इरा मिश्रा, इंदु मिश्रा, राकेश सुहाने, शरद मिश्रा, तरुण, सोनाली चोपड़ा सैकड़ों भक्त उपस्थित थे।