मानसून की पहली बारिश में ही शहर की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर गई। मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) में बुधवार को ओपीडी के समय बत्ती गुल गई। ऐसे में चिकित्सकों को मोबाइल का टॉर्च जलाकर मरीज देखना पड़ा।
अस्पताल में सुबह से बिजली का आना-जाना लगा हुआ था। दोपहर करीब एक बजे बिजली जाने के बाद जनरेटर चालू करने में 20 मिनट की देरी हो गई। ऐसे में ओपीडी में मौजूद डॉक्टराें ने मोबाइल का टॉर्च जलाकर मरीज देखे। वहीं, बारिश की वजह से अस्पताल की छत का प्लास्टर भी सीलन की वजह से झड़ने लगा।
पुराने इमरजेंसी पुरुष वार्ड की छत से प्लास्टर झड़ने की वजह से मरीजों को परेशानी हुई। कई मरीजों के बेड को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। इसके अलावा कूलर व पंखे की पर्याप्त व्यवस्था न होने की वजह से मरीजों को दिक्कत हुई। पुराने इमरजेंसी महिला व पुरुष वार्ड में कूलर गलत दिशा में लगाए गए हैं। इसके अलावा दोनों वार्ड के दो कूलर व तीन पंखे खराब हैं।
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मेरे बेड की तरफ हवा बिल्कुल नहीं आती है। पैर में प्लास्टर व सिर पर पट्टी है, इसकी वजह से गर्मी लगती है। घर का पंखा भी नहीं लाने देते हैं। साजिद उस्मानी, कौशाम्बी
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पैर टूटा हुआ है। तीन दिन से भर्ती हूं। पंखा-कूलर का पता नहीं। अब तो छत की सीमेंट भी बेड पर गिर रही है। - आरिफ, दोंदीपुर
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कहां कूलर है और कहां पंखा है, कुछ पता नहीं। दिनभर गर्मी में रहना पड़ता है। - राम नारायण केसरवानी, झलवा
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दोनों पंखा और कूलर खराब हैं। दिन भर गर्मी में गुजारना पड़ता है। - बाबू जी, करमा बाजार
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अस्पताल की इमारत पुरानी हो गई है। ऐसे में सीलन की वजह से छत का प्लास्टर गिर रहा होगा। कूलर और पंखा पर्याप्त संख्या में लगाया गया है। बारिश के बाद से लाइट की स्थिति ठीक नहीं है। - डॉ. माया देवी, चिकित्साधिकारी, कॉल्विन अस्पताल
साजिद उस्मानी
साजिद उस्मानी
साजिद उस्मानी
साजिद उस्मानी
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