पिछले कुछ वर्षों से राजकीय विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर गिरा है। पूर्व में इन विद्यालयों से हर वर्ष यूपी के टाॅपर निकलते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब वित्तविहीन विद्यालयों के टाॅपर आ रहे हैं। राजकीय विद्यालयों का पूरा खर्च सरकार उठा रही है फिर भी शिक्षा की गुणवत्ता खराब है।
राजकीय विद्यालयों में शिक्षा के गिरते स्तर को देखते हुए अब पढ़ाई की ऑनलाइन निगरानी शुरू हो गई है। प्रदेश में सबसे पहले ऑनलाइन निगरानी की शुरुआत प्रयागराज मंडल के 150 विद्यालयों से शुरू हुई। शनिवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशक डाॅ. महेंद्र देव ने संयुक्त शिक्षा निदेशक प्रयागराज कार्यालय में निगरानी तंत्र का शुभारंभ किया। अगले चरण में इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। उसके बाद एडेड विद्यालयों की भी निगरानी ऐसे ही होगी।
विज्ञापन
पिछले कुछ वर्षों से राजकीय विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर गिरा है। पूर्व में इन विद्यालयों से हर वर्ष यूपी के टाॅपर निकलते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब वित्तविहीन विद्यालयों के टाॅपर आ रहे हैं। राजकीय विद्यालयों का पूरा खर्च सरकार उठा रही है फिर भी शिक्षा की गुणवत्ता खराब है। इसको लेकर विभाग के अफसर चिंतित हैं। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की पहल संयुक्त शिक्षा निदेशक डा. दिव्यकांत शुक्ल ने की। इससे पहले यूपी बोर्ड के सचिव रहते हुए उन्होंने नकल विहीन परीक्षा कराई है।
नकल विहीन परीक्षा कराने में ऑनलाइन निगरानी वाले यूपी बोर्ड के कंट्रोल रूम की बड़ी भूमिका रही। वहां पर ऑनलाइन निगरानी का उनका प्रयोग सफल रहा है, इसलिए अब राजकीय विद्यालयों की निगरानी के लिए वैसा ही तंत्र विकसित किया है। जेडी कार्यालय में ही इसके लिए चार कंप्यूटर लगाए गए। उन कंप्यूटर से प्रयागराज के 35, कौशाम्बी के 25, फतेहपुर के 47 और प्रतापगढ़ के 43 राजकीय विद्यालयों के सीसीटीवी को जोड़ दिया गया है।
विज्ञापन
कंट्रोल रूम का शुभारंभ करते हुए शिक्षा निदेशक ने कहा कि राजकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यह निगरानी तंत्र बनाया गया है। यहां से स्कूल के प्रत्येक कमरे की गतिविधि देखी जा सकेगी। शिक्षकों के गैरहाजिर रहने, अध्यापन न करने, बच्चों के बाहर टहलने आदि पर तुरंत नोटिस जारी किया जाएगा। शिक्षक नियमित पढ़ाएंगे तो शिक्षा की गुणवत्ता जरूर बढ़ेगी। अगले चरण में इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। जेडी ने कहा कि हमारी मंशा शिक्षकों को दंडित करना नहीं, बल्कि उनको अध्यापन के लिए प्रेरित करना है। जिससे जीआईसी से टाॅपर निकलें।