केस- 1
प्रमोशन में बाधक बना प्रबंधन
ईश्वर शरण इंटर कॉलेज में 1997 में वाणिज्य विषय के लिए सहायक अध्यापक पद पर तैनात हुए रतिपाल का 2016 में प्रवक्ता के पद पर प्रमोशन होना था। विद्यालय में पद खाली हुआ और एक अगस्त 2016 को डीआईओएस ने प्रबंधक ने प्रमोशन के लिए प्रस्ताव मांगा। प्रबंधन ने उनका प्रमोशन के करने के बजाय उस पद को स्थानांतरण से भरने के लिए 29 अगस्त 2016 को डीआईओएस से सहमति ले ली। इसके लिए खिलाफ रतिपाल हाईकोर्ट गए। कोर्ट ने प्रमोशन का आदेश किया, लेकिन उसका पालन अब तक नहीं किया गया। इससे प्रबंधन उनसे नाराज हुआ और 2019 से वेतनवृदि्ध रोक दी। उनका प्रमोशन तो किया नहीं, उस पद को ही खत्म कर दिया गया। प्रवक्ता वाणिज्य की जगह प्रवक्ता भूगोल का पद सृजित करके स्थानांतरण से उसे भर दिया गया।
केस- 2
वेतन के लिए भटक रहे शिक्षक
चयन बोर्ड से 1995 में जवाहर लाल नेहरू इंटर कॉलेज जलालपुर सोरांव के लिए दिनेश उपाध्याय का चयन सहायक अध्यापक के पद पर हुआ था। चयन होने के बाद वह 10 वर्ष तक वहीं पर प्रधानाचार्य भी रहे। एक वर्ष पहले प्रबंधन से उनका विवाद हुआ। प्रबंधक ने कहा कि आपका चयन वाणिज्य विषय के शिक्षक के ताैर पर हुआ था। यहां यह विषय नहीं है। इसलिए उनका उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर नहीं करवाया जा रहा है। प्रबंधक ने दो महीने से वेतन रोक दिया है। इसकी शिकायत उन्होंने दो बार डीआईओएस से की है। मामले का निस्तारण न होने पर वह कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।