माघी पूर्णिमा पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
पुण्यदायिनी माघी पूर्णिमा शुक्रवार की शाम 3:36 बजे ही लग गई। जबकि, शनिवार की शाम 6:03 बजे तक पूर्णिमा रहेगी। ऐसे में उदया तिथि में शनिवार को ही माघी पूर्णिमा स्नान की मान्यता रही। इस बार माघी पूर्णिमा का योग मघा नक्षत्र में आरंभ हो रहा है। मघा नक्षत्र से युक्त पूर्णिमा में बुधादित्य योग, लक्ष्मी योग, शश योग और मंगल के मकर राशि में होने से रूचक योग में पुण्य की डुबकी हर कामनाओं को पूर्ण करने वाली बताई गई। पुराणों के अनुसार माघी पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु खुद गंगा स्नान करते हैं।
ऐसे में मान्यता है कि गंगा जल के स्पर्श से मनसा, वाचा और कर्मणा हर तरह के पापों का शमन हो जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक माघी पूर्णिमा पर चार राजयोगों का मिलन शुभ फलदायी होगा। इस बार जो भी श्रद्धालु माघी पूर्णिमा का व्रत पहली बार प्रारंभ करना चाहते हैं, वह शुक्रवार को आरंभ कर सकते हैं। इस दिन संगम स्नान से विशेष फल प्राप्ति होगी। इस पर्व पर डुबकी लगाकर जीवन में आई नकारात्मकता से भी मुक्ति पाई जा सकती है। माघी पूर्णिमा पर तिल और घी का दान विशेष फलदायी होगा।
माघी पूर्णिमा पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
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कल्पवासी शिविरों में मास पर्यंत यज्ञ-अनुष्ठानों की हुई पूर्णाहुति
माघी पूर्णिमा पर खीर का दान करने से हर तरह की कामनाओं की पूर्ति के योग बनेंगे। पूर्णिमा पर माघ मेले में मास पर्यंत कल्पवास करने वाले संतों-भक्तों के शिविरों में सत्यनारायण भगवान की कथाएं सुनी। इस दौरान भगवान विष्णु की सविधि पूजा की गई। मेला प्रशासन की ओर से भी कथा का आयोजन किया गया है।
ज्योतिषियों के अनुसार माघी पूर्णिमा के पर विष्णु भगवान को चावल की खीर का भोग लगाना चाहिए। इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार दान अवश्य करना चाहिए। विशेष तौर पर जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा अस्त है या कमजोर अवस्था में है, उन्हें सफेद वस्तुओं का दान करना चाहिए। माघी पूर्णिमा पर अन्न, वस्त्र के दान से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।