प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की गड़बड़ी का मुद्दा उठाए जाने के बाद आयोग बैकफुट पर आ गया है। आयोग ने छात्रा को भेजे स्पष्टीकरण में उसके मुख्य परीक्षा के अंकों का पूरा विवरण भेजा है। अंकों के विवरण में स्पष्ट किया गया है कि सुहासिनी बाजपेयी और रवींद्र तिवारी की समाजकार्य प्रथम प्रश्नपत्र की कॉपी में गलत कोड आवंटित हो गए। इस गलती से इन दोनो परीक्षार्थियों के अंक आपस में बदल गए। इस गलती का निराकरण करने के बाद सुहासिनी को साक्षात्कार में शामिल किया गया।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस परीक्षा 2015 की परीक्षा में शामिल सुहासिनी को मुख्य परीक्षा में असफल घोषित करके साक्षात्कार में नहीं बुलाया गया था। सुहासिनी की ओर से आरटीआई से जानकारी मांगे जाने के बाद आयोग ने इस परीक्षार्थी के अंकों की जांच करके साक्षात्कार में शामिल किया। अंतिम परिणाम में सफलता नहीं मिली। इस मुद्दे को समाचार पत्रों में उठाए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वाराणसी में सभा के दौरान इस मामले का जिक्र किया था।
आयोग के सचिव अटल कुमार राय की ओर से जारी स्पष्टीकरण में दोनो परीक्षार्थियों सुहासिनी और रवींद्र तिवारी के पूर्व के और संशोधित प्राप्तांक जारी किए गए हैं। सुहासिनी को पहले वैकल्पिक विषय में कुल 863.78 अंक मिले थे जबकि संशोधन के बाद उसके अंक 991.46 हो गए। यह अंक पीसीएस-2015 में महिला श्रेणी की चयनित अभ्यर्थी के कटऑफ 1042.79 से कम है। इसी प्रकार रवींद्र तिवारी को पहले वैकल्पिक विषय में कुल 826.34 अंक मिले थे। संशोधन के बाद यह अंक 787.66 हो गए। आयोग के सचिव ने इन स्पष्ट किया है कि यह गलती कोड आवंटन में गड़बड़ी के कारण हुआ था।