ओम के कंधों पर थी परिवार की जिम्मेदारी
इंटर कालेज का भी करते थे संचालन, डेरवा डिग्री कालेज के थे उपप्रबंधक
दो बच्चों के सिर से उठ गया पिता का साया, शव पहुंचते ही घर में मचा कोहराम
अमर उजाला ब्यूरो
जेठवारा। अधिवक्ता ओम मिश्रा विहिप की राजनीति करने के साथ ही शिक्षण संस्थान का संचालन भी करते थे। इसके बावजूद वह वकालत पेशे के प्रति बहुत ही जिम्मेदार थे। पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। सोमवार को कचहरी के लिए निकले ओम का शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। मासूम बेटों के सिर से पिता का साया छिन गया।
महेशगंज थाना क्षेत्र के कलिकापुर ढिंगौसी निवासी अधिवक्ता ओम मिश्रा सोमवार को घर से बाइक लेकर निकले। परिवार के लोगों से शाम को लौटने की बात कही थी, लेकिन दोपहर में ही खून से लथपथ ओम का शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। पत्नी, मां व बच्चों के साथ ही भाइयों का रो-रोकर बुरा हाल था। पांच भाइयों में सबसे बड़े ओम के दो बेटे अच्युत व आनिदय हैं। पत्नी नीलम भी पति का शव देखकर बेहोश हो जा रही थी। ओम के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी थी। वह कचहरी में सीनियर अधिवक्ता केके मिश्रा के बस्ते से वकालत सीखने के बाद प्रैक्टिस करते थे। वह डेरवा डिग्री कालेज में उपप्रबंधक भी थे। गांव में ही इंटर कालेज खोल रखा था। जिसका संचालन वह खुद करते थे। हर कोई मासूम बच्चों के चेहरे को देखते ही रोने लगता।
महेशगंज थाने के कलिकापुर सराय खानदेव अधिवक्ता के घर पहुंचे एसपी परिजनों को ढांढस बंधाते हुए।- फोटो : PRATAPGARH
महेशगंज थाने के कलिकापुर सराय खानदेव में मृत अधिवक्ता की बिलखती पत्नी।- फोटो : PRATAPGARH
महेशगंज थाने के कलिकापुर सराय खानदेव अधिवक्ता की बिलखती बहन को ले जाते पिता।- फोटो : PRATAPGARH