इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज के ग्राम- लौदखुर्द, ब्लॉक शंकरगढ़ बारा में आरती सिंह को सहायक/अकाउंटेंट कम डाटा इंट्री आपरेटर के पद पर नियुक्त होने के एक महीने 10 दिन काम करने के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी, प्रयागराज के द्वारा नियुक्ति निरस्त करने के खिलाफ याचिका पर पर जवाब मांगा है। याचिका पर जस्टिस विवेक कुमार बिरला व जस्टिस विकास बुधवार की खंडपीठ ने सुनवाई की।
याची की ओर से कहा गया कि वह पिछड़ी जाति से है। कोरोना काल में कोविड पॉजिटिव होने से उनके पति की मृत्यु हो गई थी। सरकार द्वारा 58189 वैकेंसी निकाली गई थी, जिसमे कोविड पॉजिटिव मृतक के परिजन के द्वारा आवेदन किए जाने पर जिलाधिकारी प्रयागराज की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कमेटी द्वारा संस्तुति किए जाने पर याचिकाकर्ता की नियुक्ति की गई।
याची के द्वारा एक महीने 10 दिन काम करने के पश्चात उनको जिला पंचायत राज अधिकारी ने यह कहकर उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी कि शासनादेश के क्रम में ग्राम पंचायत लौदखुर्द में ग्राम प्रधान की अनारक्षित सीट पर कोविड 19 से मृतक वारिसान के आवेदन पर केवल सामान्य जाति को ही नियुक्ति दी जा सकती है, जबकि याची पिछड़ी जाति से आती हैं, जो शासनादेश के विपरीत है।
27 जुलाई 2021 के शासनादेश के पैरा 13 में कहा गया है कि सामान्य श्रेणी की ग्राम पंचायतों में कोविड 19 की वजह से हुई मृत्यु का लाभ सामान्य श्रेणी के परिवार को ही दी जाएगी। कहा गया कि इस प्रकार का शासनादेश अवैध है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के अंतर्गत प्राप्त समानता के अधिकार का उल्लंघन है। ब्यूरो