इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गरिमामय दिन फिर वापस आएंगे। यह उम्मीद जगाई है अलग-अलग क्षेत्र के दिग्गजों ने जो इविवि के पुराछात्रा भी हैं। विश्वविद्यालय के विकास के लिए उन्होंने हर स्तर पर मदद की घोषणा की। मौका था पुराछात्रों की ओर से ही रविवार को आयोजित सम्मेलन ‘प्रयाग पर्व’ का। खास यह कि उन्होंने कुलपति की अगुवाई में विश्वविद्यालय को आगे ले जाने की घोषणा की। इसके लिए उन्होंने कुलपति से प्रारूप तैयार करने की अपील भी की है। कार्यक्रम का आयोजन केपी कम्यूनिटी में रविवार को हुआ।
पूर्व कुलपति प्रो. आरपी मिश्र, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष श्याम कृष्ण पांडेय, विनोद चंद्र दुबे, रामाधीन सिंह, कृपाशंकर उपाध्याय, आद्या प्रसाद पांडेय उर्र्फ रामजी आदि की पहल पर पहली बार आयोजित ‘प्रयाग पर्व’ में जुटे दिग्गजों ने विश्वविद्यालय के विकास की उम्मीद जगाई।
ये दिग्गज इविवि की वर्तमान स्थिति से काफी आहत दिखे। परिसर में बढ़ती अराजकता और एनआईआरएफ की रिपोर्ट में विश्वविद्यालय को 68वां स्थान मिलने से चिंतित पुराछात्रों में संस्थान को इस स्थिति से निकालने की छटपटाहट दिखी। उद्घाटन सत्र का विषय ‘स्वाधीनता के पहले ओर आजादी के बाद छात्र समुदाय की भूमिका’ था, लेकिन पुराछात्रों के संबोधन में विषय के बजाय वर्तमान स्थिति को लेकर चिंता थी। अध्यक्षता कर रहे लोकसभा के पूर्व महासचिव तथा संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने संस्मरणों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय की पुरानी गरिमा से अवगत कराया। साथ में विद्यार्थियों से पुराने लोगों जैसा व्यवहार करने की अपील की। बताया कि उन्होंने आजादी से पहले 1946 में विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और 1950 में छात्रसंघ के अध्यक्ष बने। 1953 में उन्होंने विश्वविद्यालय छोड़ दिया। उन्होंने बताया कि गांधीजी से लेकर उस समय के सभी नेता यहां के विद्यार्थियों से प्रभावित थे। इन उदाहरणों के माध्यम से सुभाष ने विश्वविद्यालय को राजनीति का अखाड़ा बनने से रोकने की अपील की। छात्राें से अपील की कि राजनीतिक लोगों को परिसर में प्रवेश न करने दें। सुभाष कश्यप ने कुलपति का ध्यान छात्रावासों में वर्षों से जमे लोगों और अवैध कब्जे की ओर दिलाया।
मुख्य अतिथि लोकसभा के पूर्व महासचिव योगेंद्र नारायण ने केंद्र सरकार की ओर से जारी रैंकिंग में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पिछड़ने के कारण बताए। बताया कि प्लेसमेंट के मामले में विश्वविद्यालय को सिर्फ 32 फीसदी अंक मिले। विश्वविद्यालय नौकरी उपलब्ध कराने में पीछे हो गया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के चार स्तंभ छात्र, शिक्षक, कुलपति और सरकार सभी को मिलकर आगे बढ़ना होगा। इसके लिए उन्होंने पुराछात्रों के स्थाई समिति के गठन की बात कही। कहा कि कमेटी इन चारों स्तंभों को साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी निभाए। उन्होंने कुलपति से अपील की कि प्रमुख पदों पर बैठे पुराछात्रों को साल में कम से कम एक बार बुलाएं और स्थिति साझा करें।
आईजी आरके चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें विश्वविद्यालय से सबकुछ मिला। अपील की कि जो भी पुराछात्र महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हैं विश्वविद्यालय के विकास में उन्हें हक अदा करना होगा। कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि सुधार जरूर होगा। प्रगतिशीलता और परंपरा को जोड़कर आगे बढ़ना होगा। कहा कि राजनीति से बचा नहीं जा सकता, लेकिन सत्ता की लोलुपता से बचना होगा। उन्होंने कहा कि यह उनकी तीर्थयात्रा रही। ठीक 50 साल पहले उन्होंने विश्वविद्यालय छोड़ा था, लेकिन यहां से खुद को कभी अलग नहीं कर पाया और इसके विकास के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे।
पूर्व कुलपति प्रो. आरपी मिश्रा ने आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि पहली बार पुराछात्र विश्वविद्यालय के विकास के लिए आगे आ रहे हैं, वह भी प्रशासन के साथ मिलकर। यह सकारात्मक पहल है। उन्हाेंने योजनाबद्ध तरीके से इस पहल को आगे बढ़ाने की अपील की। पूर्व कुलपति प्रो. जनक पांडेय ने कहा कि कुलपति प्रो. रतनलाल हांगलू के पास पूरे पांच साल हैं और कार्यकाल के शुरू में ही उन्हें एक बड़ा मंच मिल रहा है। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि के कुलपति प्रो. एमपी दुबे ने विश्वविद्यालय के इतिहास को चार भाग में बाटते हुए शिक्षकों और छात्र-छात्राओं से बदलाव के अनुरूप खुद को बदलने की अपील की। पूर्व सांसद डीपी त्रिपाठी ने संस्मरणों के माध्यम से छात्र-छात्राओं के लिए अवसर उपलब्ध कराने की अपील की। कुलपति प्रो. हांगलू से मदद की अपील की। उन्होंने विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति से अवगत कराते हुए उसमें सुधार के लिए किए जा रहे पहल पर विस्तार से प्रकाश डाला। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रामाधीन सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन श्याम कृष्ण पांडेय ने किया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में अध्यापक, छात्र-छात्रा तथा आम लोग शामिल रहे।
इविवि जल्द कराएगा पुराछात्र सम्मेलन
इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जल्द पुराछात्र सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। सम्मेलन में देश भर में अलग-अलग क्षेत्र के प्रख्यात लोगों के साथ विदेशों में प्रमुख पदों पर काबिज लोगों को भी आमंत्रित करने की तैयारी है। इतना ही नहीं विश्वविद्यालय में एक-एक हजार छात्र-छात्रा की क्षमता वाले दो हास्टल बनेंगे। इसका प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। प्रयाग पर्व में कुलपति प्रो. रतनलाल हांगलू ने इन योजनाओं की जानकारी दी।
कवियों, शायरों ने बांधी शमां
पुराछात्र सम्मेलन ‘प्रयाग पर्व’ की संध्या कवि सम्मेलन और मुशायरा से सजी। दिल्ली की डॉ.सरिता शर्मा, राजस्थान के कुंवर जावेद, सोनभद्र के कमलेश राजहंश, यश मालवीय ने रचनाओं से समारोह में समां बांधा। संचालन डॉ. श्लेष गौतम ने किया। अध्यक्षता कमलेश राजहंस ने की। अभय अवस्थी और रामजी पांडेय संयोजक रहे। इससे पहले सम्मेलन के दूसरे सत्र में ‘प्रजातंत्र के समक्ष चुनौतियां एवं न्यायपालिका’ विषय पर गोष्ठी आयोजित हुई। गोष्ठी को न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति अरुण टंडन आदि ने संबोधित किया।