एसपी रेलवे पूजा यादव कोर्ट में हुईं पेश
सरयू एक्सप्रेस में अर्धनग्न अवस्था में खून से लथपथ महिला सिपाही के मामले में सोमवार को एसपी रेलवे लखनऊ पूजा यादव मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की अदालत में पेश हुईं। कोर्ट ने उनसे घटना के संबंध में पूरी जानकारी हासिल की। एसपी रेलवे ने कोर्ट को बताया कि अभी तक कोई भी साक्ष्य पुलिस के हाथ नहीं लगा है। मामले की छानबीन की जा रही है। एसपी ने कहा कि महिला सिपाही के साथ दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है। मामले को पुरानी रंजिश से भी जोड़कर देखा जा रहा है। लखनऊ के अस्पताल में भर्ती महिला सिपाही से पूछताछ की कोशिश की गई, लेकिन हालात नाजुक होने कारण बातचीत नहीं हो सकी है।
एक बोगी में औसत चार से पांच लोग ही थे सवार
हाईकोर्ट में एसपी रेलवे ने जानकारी देते हुए बताया कि इंजन को लेकर ट्रेन में कुल 15 डिब्बे थे। घटना के समय ट्रेन में करीब 100 लोग सवार थे। जिसमें औसतन एक डिब्बे में पांच से सात लोग मौजूद थे। यह भी पता चला है कि जिस बोगी में घटना हुई है उसको अभी तक सील भी नहीं किया जा सका है। कोर्ट ने पूछा कोई विवाद सामने आया है क्या। जिस पर एसपी ने बताया कि एक संपत्ति का विवाद सामने आया है, लेकिन अभी स्पष्ट नहीं है कि घटना इसी विवाद को लेकर हुई है। बताया गया कि सिपाही कुछ बोल नहीं पा रही है। कोर्ट ने 13 सितंबर को पूरी जानकारी के साथ उपस्थित होने का आदेश जारी किया।
हाईकोर्ट को भेजी गई थी पत्र याचिका
हाईकोर्ट में राज्य सरकार के शासकीय अधिवक्ता आशुतोष कुमार संड ने बताया कि इस मामले को लेकर अधिवक्ता राम कौशिक ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश को पत्र याचिका प्रेषित की थी। कोर्ट ने पत्र याचिका का संज्ञान लिया है। रेलवे और अयोध्या के पुलिस अधिकारियों को पूरी जानकारी के साथ बुलाया गया है।
गौरतलब है कि निर्मम हालत में ट्रेन में मिली महिला सिपाही की पहचान प्रयागराज जिले के सोरांव क्षेत्र की निवासिनी के रूप में हुई है। वह 1998 बैच की महिला सिपाही है। वह सुल्तानपुर में तैनात है। सावन मेला की ड्यूटी करने वह अयोध्या आ रही थी। इस दौरान उसके साथ बर्बर घटना घटी।