अमूमन काम न करने के आदी अफसरों को ज्यादा काम करने पर होने वाले तनाव से बचने के टिप्स दिए जाएंगे। दरअसल दस से पांच की ड्यूटी में कोई पूछने वाला नहीं होता कि दफ्तर में हैं या नहीं और उस पर साप्ताहिक छुट्टियों के साथ ढेरों सार्वजनिक अवकाश। अगर ऐसे में अचानक 18-18 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ जाए तो अफसरों का तनाव में आना लाजिमी है। चुनाव में दिन-रात जागकर ऐसे ही ड्यूटी करनी पड़ती है। अफसर अवसाद में न आएं और काम प्रभावित न हो, सो इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग ने अफसरों को तनाव मुक्त रहने के लिए ट्रेनिंग दी। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम यहां सर्किट हाउस में आयोजित किया गया, जिसमें इलाहाबाद सहित 12 जिलों के अफसर शामिल हुए।
अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। आयोग की मंशा है कि चुनाव से जुड़ा कोई काम प्रभावित न हो और सब कुछ ठीक रहे। इसके लिए आयोग ने ट्रेनिंग की जिम्मेदारी एमबीडी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सौंपी है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने ‘मोटिवेशन एंड लीडरशिप ट्रेनिंग प्रोग्राम’ के तहत सर्किट हाउस में 28 से 30 अप्रैल तक चुनाव से जुड़े अफसरों को प्रशिक्षण दिया। इसमें इलाहाबाद सहित 12 जिलों के उप जिला निर्वाचन अधिकारी, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी शामिल हुए। कंपनी के प्रतिनिधियों ने अफसरों को बताया कि काम की अधिकता के दौरान अवसाद से कैसे बचा जा सकता है।
बताया कि अफसर दो तरह से काम करते हैं। जो पॉजिटिव होते हैं, वह हर काम के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। ऐसे अफसर तनाव में कम आते हैं लेकिन जो किसी भी काम को लेकर पहले ही ना-नुकुर करने लगते हैं, उन्हें निगेटिव की श्रेणी में रखा जाता है और ऐसे अफसर जल्द ही अवसाद के शिकार हो जाते हैं। जरूरी है कि अफसर मनोरंजन को भी अपने जीवन में शामिल करें और पॉजिटिव बनें। कई अफसरों पर काम का बोझ पड़ते ही उनके हाथ-पांव ढीले पड़ने लगे हैं। दरअसल, ऐसे अफसरों में नेतृत्व क्षमता की कमी होती है और इसका सीधा असर काम पर पड़ता है। अफसरों को नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए भी ट्रेनिंग दी गई। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी केके बाजपेयी ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से निश्चित तौर पर कार्यप्रणाली में सुधार होगा।