झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य अधिकारियों ने नए सिरे से अभियान शुरू कर दिया है। सीएमओ के निर्देश पर नोडल अधिकारी की अगुवाई में विभागीय टीम ने नैनी, मेजा और मांडा स्थित नर्सिंगहोम व क्लीनिकों की जांच की। नोडल अधिकारी डॉ. दीपेंद्र मालवीय की अगुवाई में टीम ने शुरुआत नैनी स्थित सूर्या एक्सरे सेंटर से की।
जांच के दौरान सेंटर संचालक डॉक्टर नदारद मिले। मौके पर मौजूद कर्मचारियों से क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन और डॉक्टरों की डिग्री मांगी गई तो वह कुछ भी नहीं दिखा सके । नोडल अधिकारी ने सबको नोटिस जारी कर दी। टीम ने नैनी स्थित शुभम डेंटल क्लीनिक और प्रिंस पाली क्लीनिक की जांच तो वहां भी डॉक्टर नदारद मिले। डॉक्टरों की डिग्री और रजिस्ट्रेशन भी दिखा।
इसके बाद जांच टीम मेजा रोड पहुंची जहां टीम ने अनामिका चैरिटेबल हास्पिटल की जांच की। जांच में पता चला कि जिस पते पर हास्पिटल का रजिस्ट्रेशन कराया गया, वहां से उसे बगैर विभागीय सूचना के ही स्थानांतरित कर दिया। टीम ने मांडा क्षेत्र के नहवाई स्थित जिम हास्पिटल की जांच की। जांच के दौरान हास्पिटल में तीन एमबीबीएस डॉक्टरों का नाम लिखा पाया गया लेकिन एक भी डॉक्टर नहीं मिला। डॉ. एके गिरी मिले जिन्होंने बताया कि वह बीएएमएस डॉक्टर हैं। नोडल अधिकारी की ओर से मौके पर नोटिस जारी की गई। जिसमें तीनों डॉक्टरों को रजिस्ट्रेशन और डिग्री के साथ सीएमओ आफिस बुलाया गया है। जांच टीम में नोडल अधिकारी डॉ.दीपेंद्र मालवीय, डॉ. संजय वर्नवाल और स्वास्थ्य शिक्षाधिकारी जियालाल शामिल थे।
अभियान की जानकारी मिलते ही कई डॉक्टर मरीजों को यूं ही लावारिस हालत में छोड़ ताला लगाकर फरार हो गए। टीम के पहुंचते ही कई डॉक्टरों को इसकी भनक लग गई। इससे पहले की टीम पहुंचती, डॉक्टर साहब फुर्र हो गए। नोडल अधिकारी डॉ. दीपेंद्र मालवीय का कहना है कि ऐसे डॉक्टरों की नए सिरे से जांच की जाएगी।