प्रयागराज। हाईकोर्ट में कार्यरत सरकारी वकीलों को अब हर दिन अपनी हाजिरी देनी होगी। उनको अपने दिन भर के कार्यों का रजिस्टर भी मेनटेन करना पड़ेगा। सरकारी वकीलों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए महाधिवक्ता उत्तर प्रदेश ने कड़े दिशा निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों को तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया गया है। इसके तहत विभिन्न न्यायालयों में तैनात किए गए विधि अधिकारियों को अधिक जवाबदेह बनाने और मुकदमों मेें सरकार की ओर से मजबूत पैरवी करने का प्रयास किया जा रहा है।
निर्देशों के तहत विधि अधिकारी हर दिन अपने कोर्ट इंचार्ज को हाजिरी देंगे। कोर्ट इंचार्ज इसका एक रजिस्टर बनाएंगे। इसी प्रकार से उनको प्रतिदिन बहस किए गए मुकदमों का पूरा ब्यौरा, उन पर हुए आदेश आदि को दर्ज करना होगा। विधि अधिकारियों को अपने बिल का स्वयं तथा अपने कोर्ट इंचार्ज से सत्यापन कराकर ही देने का निर्देश दिया गया है। यदि इसमें किसी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित कोर्ट इंचार्ज और विधि अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
महाधिवक्ता द्वारा जारी निर्देश के अनुसार न्यायालयों में सूचीबद्ध मुकदमों की फाइलें संबंधित पटल के प्रभारी एक दिन पहले ही उस कोर्ट के इंचार्ज को देंगे तथा कोर्ट इंचार्ज के माध्यम से वह फाइल विधि अधिकारियों को दी जाएगी। फाइलें वापस भी इसी तरीके से की जाएंगी तथा कोर्ट इंचार्ज से होते हुए पटल अधिकारी तक जाएगी। महाधिवक्ता ने यह भी निर्देश दिया है कि जो विधि अधिकारी शहर छोड़ते हैं, उनको लिखित रूप से इसकी सूचना महाधिवक्ता कार्यालय को देनी होगी।
इसी प्रकार से जो फाइलें विधि अधिकारियों को शपथ पत्र, अपील आदि लिखवाने के लिए आवंटित की गई हैं, वह फाइलें लिखे जाने के बाद ही वापस की जाएंगी। यदि किसी वजह से बिना लिखी फाइल वापस की जाती है तो उसका लिखित कारण बताना होगा। महाधिवक्ता ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन मुकदमों में सरकार के खिलाफ आदेश होता है अथवा सरकारी अधिकारियों को न्यायालय तलब करता है, उसकी सूचना महाधिवक्ता को ईमेल के जरिए देनी होगी। ताकि समय रहते उस पर कार्रवाई की जा सके।