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UP Police : अब हर थाने में साइबर सेल, सीधे दर्ज कराएं शिकायतें, साइबर थाने को सीधे होगी रिपोर्टिंग

Mon, 04 Dec 2023 01:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

साइबर थाने में विशेष रूप से प्रशिक्षित पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, जो इन मामलोें में त्वरित व प्रभावी ढंग से कार्रवाई करेंगे। इसकी तैयारी भी कर ली गई है। मौजूदा समय में जिले में 235 पुलिसकर्मी केंद्र सरकार के साइट्रेन प्रोजेक्ट के तहत प्रशिक्षित भी किए जा चुके हैं। 
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cyber crime - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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साइबर अपराध के मामलों में अब पीड़ित को थानों के चक्कर नहीं काटने होंगे। वर्चुअल अपराधियों से निपटने के लिए अब हर थाने में साइबर सेल होगी। पीड़ित सीधे साइबर सेल में जाकर शिकायत दर्ज कराएंगे। साइबर सेल पहले तो प्रारंभिक कार्रवाई करेगी और इसके बाद आवश्यकता के अनुसार मामले को साइबर थाने में भेज देगी। जहां रिपोर्ट दर्ज कर आगे एक्शन लिया जाएगा।

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इसके अलावा एक अहम बदलाव यह होने जा रहा है कि रेंज स्तरीय साइबर थाना अब जनपदीय साइबर थाने में परिवर्तित होने जा रहा है। इसके बाद साइबर अपराध संबंधी मामलों की शिकायत इसी थाने में दर्ज होगी। साइबर थाने में विशेष रूप से प्रशिक्षित पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, जो इन मामलोें में त्वरित व प्रभावी ढंग से कार्रवाई करेंगे। इसकी तैयारी भी कर ली गई है। मौजूदा समय में जिले में 235 पुलिसकर्मी केंद्र सरकार के साइट्रेन प्रोजेक्ट के तहत प्रशिक्षित भी किए जा चुके हैं। इनमें 25 इंस्पेक्टर भी शामिल हैं।

इसके अलावा 17 अन्य इंस्पेक्टरों को भी जल्द प्रशिक्षित कराया जाना है। सूत्रों का कहना है कि सबकुछ ठीक रहा तो दिसंबर के अंत तक व्यवस्था लागू भी हो जाएगी। एडीसीपी अपराध सतीश चंद्र ने बताया कि साइट्रेन प्रोजेक्ट के तहत पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध के विभिन्न पहलुओं व विवेचना आदि के तरीके को लेकर दक्ष किया गया है। अधिकांश पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिलाया जा चुका है।

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इंस्पेक्टर होंगे प्रभारी, यह होगा संख्या बल

जनपदीय साइबर थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर होंगे। इसके अलावा इस थाने में दो उप निरीक्षक, एक कंप्यूटर ऑपरेटर, चार मुख्य आरक्षी, 12 आरक्षी, चार महिला आरक्षी तैनात की जाएंगी। जरूरत पड़ने पर थाने में तैनात होने वाले संख्या बल को बढ़ाया भी जा सकेगा।

निस्तारण में तेजी, विवेचना की गुणवत्ता में सुधार भी

पुलिस अफसरों का मानना है कि साइबर अपराध के केस सीधे साइबर थाने में दर्ज होने से दोहरा फायदा होगा। मसलन प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों के होने से विवेचना की गुणवत्ता में सुधार आएगा। साथ ही सीधे कार्रवाई से मामलों के निस्तारण में भी तेजी आएगी। दरअसल, आईटी एक्ट से संबंधित केस की विवेचना इंस्पेक्टर या उससे ऊपर रैंक के अफसर ही कर सकते हैं। माैजूदा समय में थानों में ही केस दर्ज होने से विवेचना ज्यादातर जगह थाना प्रभारी को ही मिलती है। कानून व्यवस्था, अन्य केसों की विवेचना के साथ ही गिरफ्तारी समेत तमाम अन्य कार्यों के चलते इन केसों पर प्रभारी कम ध्यान दे पाते हैं। जिससे केस लंबित रहते हैं।

1000 से ज्यादा मामले आए हैं सामने

साइबर अपराध के केस पुलिस के लिए कितनी बड़ी चुनौती हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जनपद में केवल मौजूदा साल में ही अब तक एक हजार से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। यह हाल तब है जबकि अभी साल खत्म होने में लगभग महीने भर का वक्त बाकी है। उधर रेंज स्तरीय साइबर थाने में अब तक 18 केस दर्ज हो चुके हैं।
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