इंस्पेक्टर होंगे प्रभारी, यह होगा संख्या बल
जनपदीय साइबर थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर होंगे। इसके अलावा इस थाने में दो उप निरीक्षक, एक कंप्यूटर ऑपरेटर, चार मुख्य आरक्षी, 12 आरक्षी, चार महिला आरक्षी तैनात की जाएंगी। जरूरत पड़ने पर थाने में तैनात होने वाले संख्या बल को बढ़ाया भी जा सकेगा।
निस्तारण में तेजी, विवेचना की गुणवत्ता में सुधार भी
पुलिस अफसरों का मानना है कि साइबर अपराध के केस सीधे साइबर थाने में दर्ज होने से दोहरा फायदा होगा। मसलन प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों के होने से विवेचना की गुणवत्ता में सुधार आएगा। साथ ही सीधे कार्रवाई से मामलों के निस्तारण में भी तेजी आएगी। दरअसल, आईटी एक्ट से संबंधित केस की विवेचना इंस्पेक्टर या उससे ऊपर रैंक के अफसर ही कर सकते हैं। माैजूदा समय में थानों में ही केस दर्ज होने से विवेचना ज्यादातर जगह थाना प्रभारी को ही मिलती है। कानून व्यवस्था, अन्य केसों की विवेचना के साथ ही गिरफ्तारी समेत तमाम अन्य कार्यों के चलते इन केसों पर प्रभारी कम ध्यान दे पाते हैं। जिससे केस लंबित रहते हैं।
1000 से ज्यादा मामले आए हैं सामने
साइबर अपराध के केस पुलिस के लिए कितनी बड़ी चुनौती हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जनपद में केवल मौजूदा साल में ही अब तक एक हजार से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। यह हाल तब है जबकि अभी साल खत्म होने में लगभग महीने भर का वक्त बाकी है। उधर रेंज स्तरीय साइबर थाने में अब तक 18 केस दर्ज हो चुके हैं।