इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों के त्वरित निस्तारण और माननीयों के ऐसे मामलों में अनावश्यक स्थगन नहीं दिए जाने के निर्देश दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने ये कदम अश्विनी कुमार उपाध्याय बनाम भारत संघ और अन्य में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुक्रम में स्वत: संज्ञान जनहित याचिका पर उठाए हैं।
निर्वाचित प्रतिनिधियों से जुड़े आपराधिक मामलों के शीघ्र समाधान की निगरानी और सुनिश्चित करने की जनहित याचिका इन रिडेजिग्नेटेड कोर्ट्स फॉर एमपी/एमएलए में खंडपीठ ने निर्देश दिया कि महाधिवक्ता या सरकारी वकील मामले में अदालत की सहायता करेंगे।
विशेष अदालतें करेंगी मासिक रिपोर्टिंग
पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि विशेष अदालतें सांसदों और विधायकों के खिलाफ मौत या आजीवन कारावास की सजा वाले आपराधिक मामलों को प्राथमिकता देंगी। फिर पांच साल या उससे अधिक की कैद की सजा वाले मामलों को प्राथमिकता देंगी और फिर अन्य मामलों की सुनवाई करेंगी।
कोई अनावश्यक स्थगन नहीं करना होगा पास
खंडपीठ ने कहा कि विशेष अदालतें दुर्लभ और बाध्यकारी कारणों को छोड़कर मामलों को स्थगित नहीं करेंगी। खंडपीठ ने विशिष्ट निर्देश दिया कि यदि मामले की सुनवाई करने वाले मजिस्ट्रेट के किसी भी आदेश के खिलाफ सत्र अदालत के समक्ष कोई अपील या पुनरीक्षण लंबित है, तो ऐसे मामलों का विवरण मासिक रिटर्न में भी शामिल किया जाएगा और इसे भी न्यायालय की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा।