एडीए की कार्रवाई के बीच इलाहाबाद संग्रहालय की ओर से भी लगातार अपना पक्ष रखने की कोशिश के साथ ही राज्यपाल को पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी दी गई। संग्रहालय के निदेशक गौरव कृष्ण बंसल का कहना है कि पूरा संग्रहालय परिवार हाईकोर्ट के आदेश का पूरा सम्मान करता है लेकिन गेट को समाप्त करने के बारे में यदि कोई आदेश है तो उसकी प्रति मुझे भी दिखाई जाए। मुझे भी अपनी बात रखने का मौका मिले।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सन 1947 में पंडित जवाहर लाल नेहरू की ओर से संग्रहालय का शिलान्यास किया गया था और वर्ष 1953 में इसे आम जनता के लिए खोला गया। मुख्य सड़क से संग्रहालय को जोड़ने वाला द्वार तभी से अस्तित्व में है। तब इसे सांची के स्तूप के तोरण द्वार की अनुकृति के रूप में तैयार किया गया था लेकिन बीच में ट्रक से सामान लाने, ले जाने के दौरान वह गेट क्षतिग्रस्त हुआ तो उसे वह रूप मिला जिसे एडीए की ताजा कार्रवाई के दौरान ध्वस्त कर दिया गया है।
कहा, संग्रहालय का यह द्वार आगंतुकों को संग्रहालय से जोड़ने के लिए ही था, जिसे नगर महापालिका की ओर से तैयार कराया गया था। संग्रहालय के ध्वस्त हुए मुख्य द्वार के दोनों ओर ऐतिहासिक महत्व की कई मूर्तियां भी स्थापित थीं, जो बताती थीं कि वह द्वार संग्रहालय के प्रवेशार्थियों के लिए ही था। यह भी कि वर्ष 1917 में बने जिन छह प्रवेश द्वारों की बात की जा रही है, वे तब बने थे, जब संग्रहालय अस्तित्व में नहीं था और तब कंपनी बाग में टिकट की योजना भी नहीं थी, केवल संग्रहालय में प्रवेश के लिए ही टिकट लगता था। ऐसे में संग्रहालय के प्रवेश द्वार को वर्ष 1917 की योजना से जोड़कर देखने का कोई औचित्य नहीं है।
इलाहाबाद संग्रहालय के निदेशक की ओर पत्र लिखकर संग्रहालय के चेयरमैन और राज्यपाल को मंगलवार और बुधवार के घटनाक्रमों की पूरी जानकारी दी गई। निदेशक जीके बंसल ने बताया कि राज्यपाल को दोनों दिन पत्र लिखकर सभी गतिविधियों से अवगत करा दिया गया है। इसमें गेट को ध्वस्त किए जाने और दीवार निर्माण की जानकारी शामिल है।
संग्रहालय के प्रवेश को लेकर हुए बदलाव के बाद बीते दो वर्षों के दौरान संग्रहालय देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी गिरावट आई है। निदेशक के मुताबिक वाहनों के लिए मुख्य प्रवेश द्वार पर रोक के बाद वित्तीय वर्ष अप्रैल-2013-मार्च 2014 तक 98820 (81244 व्यस्क) पर्यटक संग्रहालय आए वहीं अप्रैल 2014 से मार्च 2015 में यह संख्या 89691 पर सिमट गई। इसमें 68505 व्यस्क शामिल है। आने वाले दिनों में पर्यटकों को दो बार टिकट लेना पड़ेगा तो इस संख्या में और ज्यादा गिरावट आ सकती है।
दरअसल आने वाले समय में संग्रहालय देखने के लिए दर्शकों को ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी। अब उन्हें पहले कंपनी बाग में प्रवेश और फिर संग्रहालय में प्रवेश के लिए अलग-अलग दो बार टिकट लेना होगा। अब तक कंपनी बाग में प्रवेश नि:शुल्क था। इस बीच संग्रहालय ने अपने टिकट काउंटर को मेन गेट पर ही खोलने का प्रस्ताव रखा है, हालांकि इस बारे में अब तक कोई स्पष्ट नीति नहीं बनी है।
इलाहाबाद संग्रहालय को मुख्य सड़क से जोड़ने वाले द्वार को बंद करने को लेकर मंगलवार को शुरू हुआ बवाल, हंगामा बुधवार को भी जारी रहा। एडीए ने सुबह संग्रहालय के गेट के स्थान पर दीवार का निर्माण शुरू कराया तो एक बार फिर संग्रहालय कर्मियों की ओर से काम बंद करने की अपील करते हुए गेट बंद करने के संबंध में आदेश की प्रति दिखाने की मांग की गई। संग्रहालय कर्मियों की एडीए अभियंताओं से बहस हुई। हंगामे की सूचना पर वहां कई थानों की पुलिस भी पहुंची।
सूचना मिलने पर सांसद केशव प्रसाद मौर्या भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने भी एडीए अभियंताओं को दो दिन काम बंद रखने को कहा। साथ ही अभियंताओं से गेट बंद करने संबंधी आदेश मांगा, जिसे अभियंताओं ने यह कह कर किनारा कर लिया कि आदेश सक्षम अधिकारियों के पास है। सांसद के जाते ही दीवार का निर्माण फिर शुरू हो गया। अभियंताओं का कहना था कि उक्त निर्माण कार्य हाईकोर्ट के आदेश पर हो रहा है। राज्यपाल की ओर से किसी तरह का आदेश होता है तो उसका पालन किया जाएगा।
इलाहाबाद विकास प्राधिकरण का दावा है कि संग्रहालय का उक्त गेट अधिकतम 20 वर्ष पूर्व बना है। यह भी कि हाईकोर्ट ने चंद्रशेखर आजाद पार्क में पहले से बने छह गेटों को ही चालू रखने का आदेश दिया है। एडीए ने उन्हीं गेटों का नए सिरे से निर्माण भी कराया है। इसीलिए संग्रहालय के सामने का सातवां गेट हटाकर दीवार बनाई जा रही है।
एडीए के एक्सईएन आरडी राय के मुताबिक चंद्रशेखर आजाद पार्क में आजादी के पहले के छह गेट हैं। इसमें सेंट जोसेफ कॉलेज के सामने, सेंट्रल लाइब्रेरी, आजाद प्रतिमा के सामने, इंडियन प्रेस चौराहा, पन्ना लाल रोड पर दरभंगा कॉलोनी के सामने और डॉ. बंसल के सामने का गेट शामिल है। यह सभी गेट सुरखी, चूना और पत्थर से बने थे, जबकि संग्रहालय के सामने का गेट ईंट से बना था।