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जमीन-फसल के मालिक का पता नहीं तो संपत्ति की रक्षा का अधिकार नहीं : कोर्ट

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन और फसल के मालिक का पता नहीं तो संपत्ति की रक्षा के अधिकार का दावा नहीं कर सकते। साथ ही जब साक्ष्यों से स्पष्ट न हो कि दोनों पक्षों में पहले हमला किसने किया तो ऐसी स्थिति ‘स्वतंत्र लड़ाई’ मानी जाएगी। प्रत्येक व्यक्ति अपने कृत्य के लिए जिम्मेदार होगा।
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इस टिप्पणी संग कोर्ट ने चार महिला अपीलकर्ताओं को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। भजन लाल और रामानंद की दोषसिद्धि बरकरार रखी। यह आदेश न्यायमूर्ति संजीव कुमार की एकल पीठ ने बाबू और अन्य की अपील पर दिया है। ललितपुर के बार थाना क्षेत्र में वर्ष 1984 में मक्के की फसल काटने को लेकर मारपीट में दोनों पक्षों से कई लोग घायल हो गए थे।
दोनों पक्षों ने मुकदमे दर्ज कराए थे। ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ताओं को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई तो फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि विवादित जमीन और फसल पर उसका अधिकार था। दूसरे पक्ष ने जबरन फसल काटने की कोशिश की। ऐसे में वह संपत्ति की रक्षा कर रहा था। इस पर बचाव पक्ष ने जमीन और फसल पर अपना अधिकार बताया। कहा कि पहले शिकायतकर्ता ने हमला किया, लेकिन दोनों पक्ष जमीन-फसल पर अपने अधिकार का दावा साबित नहीं कर सके।
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कोर्ट ने चार महिला अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। वहीं, भजन लाल और रामानंद के खिलाफ मारपीट में शामिल होने के संबंध में विशिष्ट साक्ष्य मिलने पर दोषसिद्धि बरकरार रखी। हालांकि, दोनों को तत्काल जेल भेजने के बजाय परिवीक्षा अधिनियम के तहत एक वर्ष तक अच्छे आचरण की शर्त पर राहत दे दी।
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