पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया को इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक और झटका लगा है। एकलपीठ के बाद खंडपीठ ने भी उनकी रिहाई का आदेश देने से इनकार कर दिया है। कपिलमुनि की अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए पेरोल मंजूर हो चुकी है मगर कौशाम्बी में भ्रष्टाचार का केस लंबित होने के कारण जेल अधिकारियों ने रिहाई से कर दिया है। इसके बाद उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दी थी। एकल पीठ से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद उन्होंने खंडपीठ के समक्ष याचिका दाखिल कर रिहाई की मांग की थी।
याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से दो हफ्ते में जवाब मांगा है और अधीनस्थ अदालत को याची की जमानत अर्जी यथाशीघ्र तय करने का निर्देश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई 11 जून को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति बच्चू लाल तथा न्यायमूर्ति वी सी दीक्षित की खंडपीठ ने कपिल मुनि करवरिया की याचिका पर दिया है।
याचिका पर अधिवक्ता सुरेश चंद्र द्विवेदी ने बहस की। इनका कहना है कि याची को हाईकोर्ट ने जवाहर पंडित हत्या केस मे सजा के खिलाफ आपराधिक अपील मे अल्पकालिक जमानत पर रिहाई का आदेश दिया है। भ्रष्टाचार के आरोप में लंबित एक अन्य केस के कारण जेल अधीक्षक ने रिहा करने से इनकार कर दिया है। जिसे रद कर उसे रिहा किया जाए।
मालूम हो कि भ्रष्टाचार केस में याची हिरासत में है और उस पर बी वारंट का तामीला भी हो चुका है। अग्रिम जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने कहा था कि यदि किसी मामले में कोर्ट से पेरोल के निर्देश का अनुपालन नहीं किया जा रहा है, तो यह संभवत: अग्रिम जमानत देने का आधार नहीं बन सकता। इसके लिए सही जगह पर जाना चाहिए।
याचिका मे कहा गया है कि गत 13 मई को जवाहर पंडित हत्या केस की आपराधिक अपील पर याची की अल्पकालिक जमानत मंजूर की गई है। इस आदेश के बावजूद जेल अधीक्षक भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के इस मामले के लंबित होने के कारण रिहा नहीं कर रहे हैं।
हाईकोर्ट ने गत 19 मई को भतीजी के विवाह में शामिल होने के लिए पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया, पूर्व विधायक उदयभान करवरिया एवं पूर्व एमएलसी सूरजभान करवरिया की जमानत मंजूर किया था। सूरजभान करवरिया की बेटी की शादी 19 मई को हुई। इस आदेश पर उदयभान करवरिया व सूरजभान करवरिया को नैनी जेल से रिहा कर दिया गया था लेकिन मंझनपुर थाने के भ्रष्टाचार मामले में जमानत न होने के कारण कपिलमुनि करवरिया की रिहाई नहीं हो सकी थी।
याची का कहना है कि हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत से इनकार के बाद उसने नियमित जमानत अर्जी अधीनस्थ अदालत वाराणसी मे दाखिल की है, जो विचाराधीन है। तय नही की जा रही है। इसलिए हाईकोर्ट से मिली 20 दिन की अल्पकालिक जमानत पर रिहाई की जाए। इस पर कोर्ट ने कोई राहत न देते हुए राज्य सरकार से दो हफ्ते मे जवाब मांगा है।