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आरएसएस के पास कोई : स्वामी निश्चलानंद

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झूंसी की खबर से जुड़ी फोटो - फोटो : JHUSI
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पुरी के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती नेे कहा कि आरएसएस की यह कमजोरी है कि उसके पास कोई ग्रंथ नहीं है। संघ को गुरु, गोविंद और ग्रंथ तीनों से दूर कर दिया गया। इसके उलट मुस्लिमों, सिखों और ईसाईयों को ग्रंथ दिए गए। शंकराचार्य के मुताबिक उन्होंने मोहन भागवत से कहा था कि एक ग्रंथ आरएसएस में भी अनिवार्य कीजिए। उन्हें बताया था कि उस ग्रंथ का नाम है शुक्र नीति, जिससे 32 विधियों और 64 कलाओं का बोध हो जाएगा।
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नई झूंसी स्थित शिव गंगा आश्रम में प्रवास के तीसरे दिन मंगलवार को भक्तों के सवालों का जवाब देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि गीता को समझना बहुत कठिन है। शुक्र नीति में न्याय विधा का कई पृष्ठों में वर्णन है। ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के बाद हमारा नैतिक धर्म और कर्तव्य क्या होना चाहिए, के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि एक ब्राह्मण को संस्कृत भाषा की जानकारी अवश्य होनी चाहिए।
व्यास शैली में जो ज्ञान विज्ञान हमारे शास्त्रों में है, उसको सामाजिक शैली में बताने की योग्यता भी एक ब्राह्मण में होनी चाहिए। सदाचार और संयम से संपन्न जीवन होना चाहिए। शासन तंत्र और व्यास पीठ में कोई त्रुटि हो तो उसे दूर करने का प्रयास करना भी एक ब्राह्मण का कर्तव्य है। संस्कृत भाषा की उपेक्षा के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि स्वतंत्र भारत में संस्कृतवालों के लिए आजीविका के लिए केवल पांच साधन हैं, जबकि अंग्रेजीवालों के लिए तमाम साधन हैं।
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यह एक बड़ी विसंगति है। धार्मिक होने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को रोजाना तकरीबन सवा घंटे का भजन जरूर करना चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि भजन के नाम पर विवाद उत्पन्न न हो। कहा कि भजन के बिना जीवन व्यर्थ है। भगवत भजन से ही मनुष्य का कल्याण होगा।
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