इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रस्ताव के बाद एक जज की कोर्ट का बहिष्कार समाप्त हो गया। कोर्ट ने अधिवक्ता के माफी मांगने के बाद अवमानना का केस वापस ले लिया। कोर्ट ने कहा कि एक व्यक्ति को केवल कोर्ट की अवमानना पर दंडित किया जा सकता है, लेकिन जज अथवा कुर्सी पर बैठे व्यक्ति की अवमानना के लिए नहीं। कोर्ट ने यह आदेश एक पुनर्निरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
इसके पूर्व रोजाना की तरह कोर्ट की कार्रवाई शुरू हुई लेकिन कोई भी अधिवक्ता उसमें काम करने के लिए नहीं गया। कुछ अधिवक्ता वहीं खड़े भी रहे। इसके बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, महासचिव सहित अन्य पदाधिकारी कोर्ट में पहुंचे और उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि अधिवक्ता सुनील कुमार बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं। अधिवक्ता ने कोर्ट के सामने माफी मांगी। इस पर कोर्ट ने उनके माफीनामे को स्वीकार करते हुए उन्हें अवमानना के मामले से मुक्त कर दिया।
कोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी जज की कोर्ट के बहिष्कार के मंगलवार को पारित प्रस्ताव को वापस ले लिया। इसके पूर्व अधिवक्ता के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए दूसरी कोर्ट के समक्ष मामले की सुनवाई शुरू हुई। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारी पहुंचे और उन्होंने बिना शर्त माफी मांगने की बात कही। कोर्ट ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए अधिवक्ता को संबंधित पीठ केसमक्ष पेश होकर माफी मांगने का आदेश दिया। इसके बाद अधिवक्ता संबंधित पीठ के समक्ष पेश हुए और माफी मांग ली। इसके बाद कोर्ट ने माफी को स्वीकार कर पुनर्निरीक्षण याचिका पर सुनवाई को आगे बढ़ा दिया।