स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण और राष्ट्रगान का मदरसा प्रबंधन ने भी स्वागत किया गया है लेकिन इस मौके पर वीडियोग्राफी कराए जाने के सरकारी आदेश को लेकर उन्होंने हैरानगी जताई, साथ ही असंतोष भी व्यक्त किया है। गढ़ी सराय स्थित मदरसा सुब्हानिया के प्रबंधक डॉ.अहमद काफी कहते हैं, सरकारी या अनुदान प्राप्त मदरसों में पहले भी ध्वजारोहण और राष्ट्रगान होता रहा है। हालांकि वीडियोग्राफी का आदेश देने वाली बात समझ से परे है। सिर्फ मदरसों के लिए ही क्यों, अन्य स्कूलों और संस्थाओं के लिए भी ऐसा ही आदेश लागू होना चाहिए।
दारागंज स्थित मदरसा अरबिया कंजुल उलूम के प्रबंधक मौलाना सिराजुस्सालकीन कहते हैं, मदरसे में राष्ट्रीय पर्व मनाने के साथ ही राष्ट्रगान भी होता है। हमेशा होता रहा है, इस बार भी होगा लेकिन वीडियोग्राफी की बात कहकर हमारी वतनियत पर शक करना मुनासिब नहीं है। करेलाबाग स्थित मदरसा अफजलुल मदारिस के प्रिसिंपल मौलाना फरीद अहमद ने भी कहा कि मदरसे में राष्ट्रीय पर्व पर ध्वजारोहण के साथ ही राष्ट्रगान भी होगा। पहले ‘सारे जहां से अच्छा’ तराना गाया जाता रहा।
मिर्जा गालिब रोड स्थित मदरसा दारुल उलूम गरीब नवाज के प्रिसिंपल और
शहर काजी मुफ्ती शफीक अहमद शरीफी कहते हैं, राष्ट्रीय पर्वों पर मदरसों में तो पहले भी राष्ट्रीय ध्वज लहराने सहित इन मौकों की अहमियत बताई जाती रही है। देश को आजादी दिलाने में मुसलमानों का भी अहम योगदान रहा है। मदरसों में तालीम उर्दू में दी जाती है, ऐसे में इकबाल का तराना ‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा’ गाया जाता रहा है, अब राष्ट्रगान भी गाया जाएगा। हालांकि वीडियोग्राफी का हुक्म तो ज्यादती है। बहुत सारे उलेमा तस्वीर को नाजायज और हराम करार देते हैं, ऐसे में हुकूमत से गुजारिश है कि इसे ‘जरूरी’ न किया जाए।