फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राष्ट्रगान पर ऐतराज नहीं, पर वीडियोग्राफी ज्यादती

Sat, 12 Aug 2017 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
flag
विज्ञापन
स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण और राष्ट्रगान का मदरसा प्रबंधन ने भी स्वागत किया गया है लेकिन इस मौके पर वीडियोग्राफी कराए जाने के सरकारी आदेश को लेकर उन्होंने हैरानगी जताई, साथ ही असंतोष भी व्यक्त किया है। गढ़ी सराय स्थित मदरसा सुब्हानिया के प्रबंधक डॉ.अहमद काफी कहते हैं, सरकारी या अनुदान प्राप्त मदरसों में पहले भी ध्वजारोहण और राष्ट्रगान होता रहा है। हालांकि वीडियोग्राफी का आदेश देने वाली बात समझ से परे है। सिर्फ मदरसों के लिए ही क्यों, अन्य स्कूलों और संस्थाओं के लिए भी ऐसा ही आदेश लागू होना चाहिए।
विज्ञापन


दारागंज स्थित मदरसा अरबिया कंजुल उलूम के प्रबंधक मौलाना सिराजुस्सालकीन कहते हैं, मदरसे में राष्ट्रीय पर्व मनाने के साथ ही राष्ट्रगान भी होता है। हमेशा होता रहा है, इस बार भी होगा लेकिन वीडियोग्राफी की बात कहकर हमारी वतनियत पर शक करना मुनासिब नहीं है। करेलाबाग स्थित मदरसा अफजलुल मदारिस के प्रिसिंपल मौलाना फरीद अहमद ने भी कहा कि मदरसे में राष्ट्रीय पर्व पर ध्वजारोहण के साथ ही राष्ट्रगान भी होगा। पहले ‘सारे जहां से अच्छा’ तराना गाया जाता रहा।
मिर्जा गालिब रोड स्थित मदरसा दारुल उलूम गरीब नवाज के प्रिसिंपल और

शहर काजी मुफ्ती शफीक अहमद शरीफी कहते हैं, राष्ट्रीय पर्वों पर मदरसों में तो पहले भी राष्ट्रीय ध्वज लहराने सहित इन मौकों की अहमियत बताई जाती रही है। देश को आजादी दिलाने में मुसलमानों का भी  अहम योगदान रहा है। मदरसों में तालीम उर्दू में दी जाती है, ऐसे में इकबाल का तराना ‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा’ गाया जाता रहा है, अब राष्ट्रगान भी गाया जाएगा। हालांकि वीडियोग्राफी का हुक्म तो ज्यादती है। बहुत सारे उलेमा तस्वीर को नाजायज और हराम करार देते हैं, ऐसे में हुकूमत से गुजारिश है कि इसे ‘जरूरी’ न किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें