गोवर्धनमठ पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा है कि भारत विश्व का हृदय है। इसकी दिव्यता, भव्यता और अलौकिकता अद्वितीय है। यह श्रीराम और श्रीकृष्ण की धरती है।
गोवर्धनमठ पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा है कि भारत विश्व का हृदय है। इसकी दिव्यता, भव्यता और अलौकिकता अद्वितीय है। यह श्रीराम और श्रीकृष्ण की धरती है। विश्व की कोई शक्ति भारत की दिव्यता को नहीं मिटा सकती। उन्होंने ने यह बातें बुधवार को नई झूंसी स्थित अपने शिवगंगा आश्रम में भक्तों से कहीं। उन्होंने आगे कहा कि युवा पीढ़ी अगर सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए आगे नहीं आई तो गंभीर हालात बनेंगे। जीवन का उद्देश्य केवल खाना-कमाना नहीं होना चाहिए। जीविकोपार्जन जीवन के लिए हो न कि जीवन जीविकोपार्जन के लिए। धर्मानुकूल जीवन जीते हुए ईश्वर भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए।
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शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि इस धरती पर साक्षात नारायण राम और कृष्ण के रूप में अवतरित हुए। आज भारतीय संस्कृति के खिलाफ वैश्विक स्तर पर षड्यंत्र चल रहा है। हमें सजग रहना होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी देश में अल्पसंख्यकों को रहने का अधिकार है, लेकिन उन्हें उस देश की संस्कृति के साथ मिलजुल कर रहना चाहिए। हमें धैर्य नहीं खोना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बिना मुट्ठी खोले दान नहीं होता। अन्न और जल का त्याग किए बिना व्रत नहीं होता। सुख का त्याग किए बिना तप नहीं होता। दान और तप से ही जीवन में बल और वेग आता है। यज्ञ, दान, तप और व्रत की महत्ता को समझना होगा। राजनीति वेदों के अनुसार होनी चाहिए। शासक ऐसा हो जो देश को सही दिशा दे। विकास जरूरी है लेकिन योजनाएं पर्यावरण को ध्यान में रखकर बननी चाहिए। इस मौके पर शंकराचार्य के निजी सचिव स्वामी निर्विकल्पानंद सरस्वती, प्रफुल्ल चैतन्य ब्रम्हचारी, ऋषिकेश ब्रह्मचारी आदि मौजूद रहे।