झूंसी। पुरीपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का कहना है कि यदि प्रधानमंत्री में गंगा को प्रदूषणमुक्त करने के लिए सच्ची वेदना है तो पूरी ईमानदारी के साथ प्रदूषणमुक्त अभियान चलाना होगा तभी भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की पहचान गंगा प्रदूषणमुक्त हो सकेगी। नई झूंसी स्थित शिवगंगा आश्रम में रविवार को अमर उजाला से बातचीत में पुरी शंकराचार्य ने कहा कि गंगा को स्वच्छ और निर्मल करने के लिए सरकार और संस्थाएं ईमानदारी से काम नहीं कर रही हैं। केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई नमामि गंगे योजना के सवाल पर उन्होंने कहा कि काशी और प्रयाग में गंगा के किनारे पक्के और चमकते घाट बनाने से गंगा थोड़े ही निर्मल हो जाएंगी।
सुझाव दिया कि उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक गंगा के हितैषी लोगों को बुलाकर बात करनी होगा। इसमें धार्मिक और आध्यात्मिक जगत के मनीषियों को भी शामिल करना होगा। गंगा जल से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को निरस्त कर दिए जाए तो 50 प्रतिशत नदी अपने आप अस्तित्व में आ जाएगी। विदेशों से बुलाकर गंगा का निरीक्षण कराना गंगा संरक्षण नहीं है। उत्तराखंड में कांग्रेस और भाजपा की सरकारों ने विकास के नाम पर गंगा का गला घोंट दिया। गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने को बनाई गई तमाम योजनाएं आंख में धूल झोंक रही हैं। बीते दिनों गंगा में गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान साधु-संत और प्रशासन के बीच उपजे विवाद और लाठीचार्ज प्रकरण के बारे में उन्होंने अनभिज्ञता जताई। कहा, तब मैं पुरी में चार्तुमास कर रहा था, ऐसे में सुनी-सुनाई बातों का कोई जवाब नहीं।
स्वामी निश्चलानंद झूंसी आश्रम में तीन दिनी प्रवास के दौरान गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने सहित कई अन्य मुद्दों पर विचार गोष्ठी में शामिल होंगे। वह छह अक्तूबर तक नई झूंसी आश्रम में रुकने के बाद सात अक्तूबर को पंजाब के लिए रवाना होंगे।