कोर्ट ने गवाहों के बयान पर नहीं किया विश्वास
पुलिस ने लल्ली सिंह, जय करन सिंह, झल्लर सिंह, पप्पू यादव, कर्पूरी और शिव नाथ यादव, चालू यादव उर्फ राम चंद्र उर्फ बलबीर और झंडे यादव के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। जबकि, नामजद आरोपी इंद्र बहादुर सिंह, घनश्याम सिंह, हरनाम सिंह और वीरेंद्र का नाम विवेचना में निकाल दिया गया। बाद में हरनाम सिंह के मुकदमे को ट्रायल कोर्ट ने 2007 और पप्पू यादव उर्फ कर्पूरी के 2013 में समाप्त कर दिया था।
15 अप्रैल 2015 को सत्र न्यायालय ने लल्ली सिंह, वीरेंद्र, झंडे यादव, चालू यादव उर्फ राम चंद्र यादव, घनश्याम सिंह, जय करण सिंह, झल्लर सिंह, शिवनाथ यादव एवं इंद्र बहादुर सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ सभी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने प्रत्यक्षदर्शी के रूप में पेश गवाह व वादी मुकदमा की गवाही को अविश्वसनीय मानते हुए सभी नौ आरोपियों को बेगुनाह बताते हुए आरोपों से बरी कर दिया।