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MNNIT Sucide Case : इंजीनियर बनने के सपने को संजोकर हम सब से दूर हो गया निकेश...शव को देख फफक पड़े पिता

Fri, 23 May 2025 09:02 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

निकेश का सपना इंजीनियर बनने का था। इसके लिए उसने खूब पढ़ाई की और आईआईटी बेंगलूरू से जेईई मेन में टॉप रैकिंग हासिल कर लिया। इस वजह से उसे प्रयागराज मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में बीटेक कंप्यूटर साइंस में दाखिला मिल गया।
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पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बैठे परिजन। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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निकेश का सपना इंजीनियर बनने का था। इसके लिए उसने खूब पढ़ाई की और आईआईटी बेंगलूरू से जेईई मेन में टॉप रैकिंग हासिल कर लिया। इस वजह से उसे प्रयागराज मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में बीटेक कंप्यूटर साइंस में दाखिला मिल गया।

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लेकिन, क्या पता था कि जिस बेटे का सपना पूरा करने के लिए कर्ज ले रहा हूं, वहीं अब हम सब को छोड़ कर चला जाएगा। यह शब्द निकेश के पिता अमृत लाल के हैं। बेटे के शव को देखते ही वह फफक कर रो पड़े। निकेश के मौत की सूचना पर शुक्रवार तड़के पांच बजे छत्तीसगढ़ के जिला जांजगीर थाना बिर्रा के गांव सेमरिया से अमृत लाल (पिता), दिवेश कुमार (फूफा) और ओमकार (मामा) शिवकुटी थाने पहुंचे। इसके बाद पुलिस टीम के साथ एमएनएनआईटी और फिर एसआरएन के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे।

यहां निकेश के शव को देख परिवार को यकीन ही नहीं था कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। शव देखते ही पिता फफक कर रो पड़ा। बोले, बेटा क्यों मुझे छोड़कर चला गया। तुझे तो इंजीनियर बनना था। बिना सपना पूरे किए ही हम सब को छोड़कर चला गया। दोपहर करीब दो बजे पोस्टमार्टम शुरू हुआ। इसके बाद पुलिस ने शव को परिजनों को सौंप दिया। जहां देर-शाम परिजन शव को लेकर अपने मूलगांव के लिए रवाना हो गए।

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तीन बहनों में इकलौता था निकेश

फूफा दिवेश कुमार ने बताया कि निकेश के पिता अमृत गांव में ही खेती करते हैं। घर में अमृत उनकी पत्नी नंदेश्वरी, बेटी नेहा, निकिता, आकृति रहती है। निकेश तीन बहनों में इकलौता बेटा था वह दो बहनों के बाद तीसरे नंबर था। बचपन से ही निकेश पढ़ने में बहुत तेज था। हमेशा कहता था कि एक दिन इंजीनियर बनूंगा। इसी सपने का साकार करने के लिए निकेश को गांव के एक ही एक अच्छे स्कूल से पढ़ाई करवाई। इसके बाद 2024 में उसने आईआईटी बेंगलूरू से जेईई मेन में टॉप रैकिंग हासिल कर ली। इसी आधार पर ही इसे ये कॉलेज मिला था।

पढ़ाई के लिए ढाई लाख खर्च किए

पिता ने बताया कि वह किसान हैं। खेती से अपना परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बेटे के दांए हाथ की अंगुलियों में दिक्कत थी। जेईई मेन में अच्छी रैंकिंग हासिल करने के बाद उनपर अचानक खर्च का बोझ भी आ गया। एमएनएनआईटी में दाखिले से लेकर नया लैपटॉप दिलाने तक लगभग ढाई लाख रुपये का खर्च आया। इसमें उन्होंने कुछ कर्जा भी लिया। उन्होंने कहा कि मेरे परवरिश में ही ऐसी क्या कमी थी जो बेटा निकेश हम सब से इतना दूर छोड़कर चला गया।

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