तीन बहनों में इकलौता था निकेश
फूफा दिवेश कुमार ने बताया कि निकेश के पिता अमृत गांव में ही खेती करते हैं। घर में अमृत उनकी पत्नी नंदेश्वरी, बेटी नेहा, निकिता, आकृति रहती है। निकेश तीन बहनों में इकलौता बेटा था वह दो बहनों के बाद तीसरे नंबर था। बचपन से ही निकेश पढ़ने में बहुत तेज था। हमेशा कहता था कि एक दिन इंजीनियर बनूंगा। इसी सपने का साकार करने के लिए निकेश को गांव के एक ही एक अच्छे स्कूल से पढ़ाई करवाई। इसके बाद 2024 में उसने आईआईटी बेंगलूरू से जेईई मेन में टॉप रैकिंग हासिल कर ली। इसी आधार पर ही इसे ये कॉलेज मिला था।
पढ़ाई के लिए ढाई लाख खर्च किए
पिता ने बताया कि वह किसान हैं। खेती से अपना परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बेटे के दांए हाथ की अंगुलियों में दिक्कत थी। जेईई मेन में अच्छी रैंकिंग हासिल करने के बाद उनपर अचानक खर्च का बोझ भी आ गया। एमएनएनआईटी में दाखिले से लेकर नया लैपटॉप दिलाने तक लगभग ढाई लाख रुपये का खर्च आया। इसमें उन्होंने कुछ कर्जा भी लिया। उन्होंने कहा कि मेरे परवरिश में ही ऐसी क्या कमी थी जो बेटा निकेश हम सब से इतना दूर छोड़कर चला गया।