उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के संयोजकत्व में आयोजित तीन दिनी ऑर्थोकॉन में देश-विदेश से आए 700 से अधिक हड्डी रोग विशेषज्ञों ने कूल्हा, कंधा और जोड़ों को बचाने और उनके उपचार की नई विधियों पर चर्चा कर अनुभव साझा किए। डॉक्टरों ने बताया कि कूल्हा बदलने के लिए अब सिर्फ एक छोटा छेद किया जा रहा है जबकि पहले बड़ा चीरा लगाना पड़ता था। घुटनों को बचाने के लिए सर्जरी से ज्यादा वजन कम करने को जरूरी बताया गया। विशेषज्ञों की आम राय रही कि लोग दिनचर्या नियमित कर आहार पर ध्यान देंगे तो हड्डियां मजबूत रहेंगी। फिर मिलेंगे वादे के साथ सबने विदा ली।
ऑर्थोकॉन में रविवार को बच्चों के हड्डी रोगों और उनके उपचार के बारे में मुंबई से आए डॉ. अशोक जौहरी ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पैदाइश के तुरंत बाद बच्चों को होने वाले विकारों की जांच और उसके निदान के प्रयास किए जाने चाहिए। कुशल चिकित्सक से जन्म के तुरंत बाद शिशु के स्वास्थ्य का परीक्षण करा लेने से बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है। अधिकांश मामलों में बीमारी का पता न चलने से उम्र बढ़ने के साथ जिंदगी भर परेशानी होती है।
डॉ. जौहरी ने अपने व्याख्यान में जन्म के तुरंत बाद संक्रमित बच्चों के इलाज के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय पूर्व होने वाले प्रसव के मामले में संक्रमण अधिक होता है। बच्चों को सांस लेने में दिक्कत संक्रमण का बड़ा कारण बनता है। यह जोड़ों को प्रभावित करता है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड कराने के बाद सिर्फ दवा से नहीं बल्कि मवाद निकालकर इलाज करना मरीज के लिए ठीक रहता है। इस मौके पर सेरेब्रल पालिसी पीड़ित बच्चों का उपचार कर रहे डॉ. जितेंद्र जैन भी मौजूद रहे।
बीएचयू के प्रोफेसर एसके सर्राफ ने टेढ़ी-मेढ़ी हड्डियों को ठीक करने के बारे में जानकारी दी। बंगलूरू से आए डॉ. राजीव राय ने कूल्हे की हड्डियों में टूट फूट या कूल्हा स्थापना की नई विधि के बारे में बताया। उन्होंने कहाकि अब स्कू लगाने की दिशा बदल कर कूल्हे और हड्डियों को अधिक मजबूती दी जा रही है। यह ऑपरेशन सरल और दर्द रहित है। इस बारे में वीडियो दिखाकर उन्होंने चिकित्सकों को नई जानकारियां दीं।
ऑर्थोकॉन के तकनीकी सत्र में रविवार को चेयरमैन डॉ. केडी त्रिपाठी, ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. मनोज गुप्ता, आयोजन सचिव डॉ. अनुज गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर एएमए सचिव डॉ. त्रिभुवन सिंह, डॉ.कपिल कुलश्रेष्ठ, डॉ. पीयूष मिश्रा, डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. सुरेश मौर्या, डॉ. शरद जैन, डॉ. निकुंज अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में हड्डी रोग विशेषज्ञ मौजूद रहे।
हड्डियों की बीमारियों में खासकर बांह, हथेली या कोहनी के ऑपरेशन के दौरान प्लेटिंग का तरीका बदलने से मरीजों को राहत मिली है। मेरठ से आए डॉ. एसएम शर्मा ने बताया इस नई विधि से प्लेट लगाने से हड्डियों का जोड़ मजबूत होता है। मरीज को तीन महीने प्लास्टर बांधने की दिक्कत से निजात मिलती है। मरीज बांह, हथेली या कोहनी का ऑपरेशन कराकर तीन दिन में हाथ को मूवमेंट करा कर खुद कप उठाकर चाय पी सकता है। बस कुछ एहतियात बरतने की जरूरत होती है।
एम्स दिल्ली से ऑर्थोकॉन में व्याख्यान देने आए डॉ. चंद्रशेखर यादव ने घुटनों और कूल्हे से बीमारी से बचने के लिए साधारण उपाय बताए। डॉ. बीसी राय और यश भारती अवार्डी डॉ. यादव ने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि मरीज का वजन न बढ़े। पीड़ित आहार-विहार पर नियंत्रण कर साधारण व्यायाम और वॉक कर बड़ी परेशानी से बच सकते हैं। उन्होंने कहाकि सिर्फ एक्सरे देखकर हिप या ज्वाइंट रिपलेसमेंट का निर्णय नहीं लेना चाहिए। मरीज को मांसपेशियां मजबूत बनाने के उपाय बताएं, व्यायाम कराएं तो आराम मिलेगा। इससे बात न बने तो ऑपरेशन की सलाह देने चाहिए। उन्होंने कहाकि साधारण अस्पतालों में हिप या ज्वाइंट रिपलेसमेंट करना ठीक नहीं होता। इसमें चिकित्सक अनुभवी हों, अस्पताल में सुविधाएं आधुनिक होने के साथ इंप्लांट गुणवत्ता वाले होने चाहिए। उन्होंने कहाकि फिलहाल इंप्लांट के क्षेत्र में हमें विदेश का ही सहारा है। देश में इंप्लांट के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ करना है।