अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में विज्ञापन संख्या-51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 1017 पदों पर भर्ती के लिए साल भर पहले आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यह भर्ती भी नए आयोग के गठन के इंतजार में फंसी हुई है। इस साल जून में महाविद्यालयों में शिक्षकों के रिटायर होने पर सैकड़ों पद खाली हुए हैं। अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि नए पदों को पुराने विज्ञापन में शामिल किया जाए।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि साल भर से भर्तियां ठप पड़ी हुईं हैं। ऐसे में नए रिक्त पदों को भी पुराने विज्ञापनों में शामिल किया जाना चाहिए या आयोग का गठन होते ही जब पुराने विज्ञापनों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हो, उसी के साथ नए पदों के विज्ञापन भी जारी कर दिए जाएं, ताकि अभ्यर्थियों को अगली भर्ती के लिए इंतजार न करना पड़े। नए आयोग का गठन होते ही इस मुद्दे पर आंदोलन किया जाएगा।
सोशल मीडिया पर छाया शिक्षक भर्ती का मुद्दा
परिषदीय विद्यालयों में नई शिक्षक भर्ती का विज्ञापन शीघ्र जारी किए जाने की मांग को लेकर टीईटी सीटीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों ने ट्विटर पर अभियान चलाया। डीएलएड बीटीसी संघ के अध्यक्ष विनोद पटेल का कहना है कि सभी प्रशिक्षु साथी सोशल मीडिया के माध्यम से प्राथमिक शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी करने की मांग आगे भी करते रहेंगे। उन्हें उम्मीद है कि आगे कुछ सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। पिछली भर्ती वर्ष 2018 में आई थी। हाल ही में राज्यसभा में केंद्र सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के 126028 पद रिक्त बताए गए हैं।