फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दस नरकों से उबारने को जरूरी दस पुत्र

Sat, 07 Feb 2015 11:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
संगम की रेती पर आयोजित विश्व हिन्दू सम्मेलन में साक्षी महाराज और साध्वी प्राची की राह पर चलते हुए शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने फिर कहा कि दस नरकों से उबारने के लिए हिन्दुओं को दस पुत्र चाहिए। उन्होंने गंगा को धरती पर लाने वाले राजा भागीरथ के साठ हजार पुत्रों का उदाहरण दिया। कहा, जीवन में 10 प्रकार के नरक होते हैं, जिनसे उबारने के लिए 10 पुत्रों का होना जरूरी है। इस तर्क को साबित करने के लिए उन्होंने राजा दशरथ की तीन रानियों सहित कई अन्य राजाओं की रानियों का भी जिक्र किया।
विज्ञापन


सम्मेलन के दौरान शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने  शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और नगर विकास मंत्री आजम खां पर भी टिप्पणी की। उन्होंने शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की ओर से साईं के खिलाफ छेड़ी गई मुहिम को अनुचित बताया। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए साई की चार पीढ़ियों का नाम गिनाया। कहा, साईं को दूसरे धर्म का बताना ठीक नहीं है। वह राजस्थान में रहने वाले शर्मा ब्राह्मण थे। उनके वंशज अब भी राजस्थान में रह रहे हैं। इतना ही नहीं उनके वंशजों में से एक दिल्ली हाईकोर्ट के जज भी रह चुके हैं। सो, साईं संत हैं। हिन्दू धर्म में संत और गुरु की पूजा की जाती है। इसलिए साईं को भी उसी अनुरूप देखना चाहिए।

शंकराचार्य ने नगर विकास मंत्री आजम खां को भी आड़े हाथों लिया। कहा, आजम को मजहबी मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। वह अपने मजहब के बारे में ही फतवा जारी करें। इसी क्रम में शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद के शिष्य आत्मानंद ब्रह्मचारी ने भी दस बच्चे पैदा करने की वकालत की।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें