कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए उतर मध्य रेलवे प्रशासन ने 30 आइसोलेशन कोच बनाने का निर्णय लिया है। यह काम एनसीआर प्रशासन ने शुरू भी कर दिया है। उत्तर रेलवे के दिल्ली कोचिंग डिपो की तर्ज पर ही एनसीआर इन कोचों का निर्माण कर रहा है। इसके अलावा एनसीआर प्रशासन ने सेनिटाइजर और मास्क बनाने का काम भी तेज कर दिया है।
एनसीआर के कोचिंग डिपो में ही आइसोलेशन कोच बनाने का काम शुरू किया गया है। स्लीपर कोच को मॉडीफाई कर इन कोचों का निर्माण कार्य चल रहा है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे और उत्तर रेलवे द्वारा बनाए गए प्रोटोटाइप कोच की डिजाइन के अनुरूप ही एनसीआर ने आइसोलेशन कोच का निर्माण शुरू किया है। इसके अलावा इनहाउस मास्क और सेनिटाइजर बनाने का काम भी रेलवे ने तेज कर दिया है। एनसीआर के कोचिंग डिपो और अन्य इकाइयों द्वारा दस हजार फेस मास्क का उत्पादन अब तक किया जा चुका है।
कोचिंग डिपो एवं केंद्रीय चिकित्सालय द्वारा अब तक दो हजार लीटर सेनिटाइजर तैयार किया जा चुका है। उधर रेलवे ने आपातकालीन स्थिति के मद्देनजर अस्थायी रूप से सेवानिवृत्त रेलवे मेडिकल प्रैक्टिशनर या खुले बाजार से डाक्टर और पैरामेडिक कर्मचारियों को रखने के लिए अधिकृत किया है।
लॉक डाउन में फंसे 750 मजदूर की देखभाल रेलवे के जिम्मे
लॉक डाउन के दौरान विभिन्न स्थानों पर फंसे तकरीबन 750 संविदा मजदूर की देखरेख एनसीआर के तीन मंडल प्रयागराज, आगरा एवं झांसी मंडल द्वारा की जा रही है। इसके अलावा एनसीआर के विभिन्न स्टेशनों पर आरपीएफ की ओर से नियमित रूप से एक हजार से अधिक जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है।