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मदरसों में भी राष्ट्रगान गाना अनिवार्य: हाईकोर्ट

Thu, 05 Oct 2017 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
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मदरसों में राष्ट्रगान गाने की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रध्वज का सम्मान करना हर नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य है। कोर्ट ने कहा कि इतना ही नहीं राष्ट्रगान राष्ट्रीय अखंडता, पंथ निरपेक्षता और लोकतांत्रिक भावना का प्रसार करता है। इसी प्रकार से राष्ट्रध्वज कपड़े और स्याही से बना एक टुकड़ा मात्र नहीं है, यह स्वाधीनता के लक्ष्य को हासिल करने का जरिया है। राष्ट्रगान गाना और राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराना सभी शिक्षण संस्थाओं और अन्य संस्थाओं में अनिवार्य है।
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मऊ के अलाउल मुस्तफा की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने सुनवाई की। याचिका में तीन अगस्त 2017 के शासनादेश और छह सितंबर 2017 के परिपत्र को चुनौती दी गई थी। इन आदेशों में सरकार ने सभी मदरसों में राष्ट्रगान गाना और राष्ट्रध्वज फहराना अनिवार्य कर दिया। बाद में मदरसों से सरकार ने स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम की रिकार्डिंग भी मांगी थी। याची के अधिवक्ता शाहिद अली सिद्दकी की दलील थी कि मदरसों में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों को राष्ट्रगान गाने के लिए विवश न किया जाए। ऐसा करने के लिए विवश करने का अर्थ है जबरदस्ती राष्ट्रभक्ति को थोपना। मदरसों को एक ऐसा गीत गाने के लिए विवश नहीं किया जा सकता है, जो उनकी धार्मिक आस्था और विश्वास के विपरीत है।

याचिका खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि याची ऐसा कोई भी तथ्य बताने में असफल रहा है जिससे यह साबित हो कि राष्ट्रगान गाने से उनकी धार्मिक आस्था और विश्वास पर कोई प्रभाव पड़ेगा। याचिका में ऐसा भी कोई साक्ष्य नहीं दिया गया, जिससे यह पता चले कि मदरसे में पढ़ने वाले छात्रों को राष्ट्रगान गाने में कोई आपत्ति है। कोर्ट ने सभी विभागों के प्रमुख सचिवों को निर्देश दिया है कि स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त और गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को सभी शिक्षण संस्थाओं सहित अन्य संस्थाओं में राष्ट्रगान गाना और तिरंगा फहराना सुनिश्चित किया जाए।
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याचिका पर सुनवाई कर रही खंडपीठ ने कहा कि याची संवैधानिक दायित्व की शिक्षा ग्रहण करे, जैसा कि हम सभी नागरिकों ने किया है और उसे सदैव दिमाग में रखे कि ऐसा प्रयास जैसा कि इस याचिका में किया गया है वह साम्प्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ने वाला है। कोर्ट ने याचिका को अनावश्यक करार देते हुए खारिज कर दिया है।

कोर्ट ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 51 ए मौलिक नागरिकों के मौलिक कर्तव्य का वर्णन करता है। जिसके अनुसार राष्ट्रगान गाना और राष्ट्रध्वज फहराना हर नागरिक का कर्तव्य है। राष्ट्रगान गाने का अर्थ है कि नागरिक अपने महान देश के इतिहास, उसकी परंपराओं और बिना किसी धर्म, भाषा, क्षेत्र  भेद के आपसी भाईचारे की भावना को बढ़ावा देते हैं।
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